वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती नालियों के किनारे लगाया गया है। और अपनी ऋतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं। इसलिये जो कुछ वह पुरूष करे वह सफल होता है। (भजन संहिता 1:3)

आपके लिए परमेश्वर की इच्छा है कि आप फलवंत बनें—कभी-कभी नहीं, बल्कि हर समय। हर मौसम में, वह चाहता है कि आप फले-फूलें, समृद्ध हों और बढ़ें। भले ही परिस्थितियाँ सूखी या अनिश्चित लगें, फिर भी आपके भीतर का परमेश्वर का वचन एक ऐसी नदी है जो कभी नहीं सूखती। आपको कभी-कभार फलवंतता का मौसम पाने के लिए नहीं बनाया गया है, बल्कि उत्पादकता और बढ़ोतरी के निरंतर प्रवाह में रहने के लिए बनाया गया है।

सफलता और फलवंतता के लिए जो कुछ भी आपको चाहिए वह पहले से ही आपकी आत्मा में मौजूद है। परमेश्वर ने आपको जीवन और भक्ति से संबंधित सभी चीजें पहले से ही दे दी हैं (2 पतरस 1:3)। आप किसी आशीष की प्रतीक्षा नहीं कर रहे हैं; आशीष आप में से प्रवाहित होने की प्रतीक्षा कर रहा है। आप अंदर क्या “पका रहे” हैं, यह निर्धारित करता है कि बाहर क्या प्रकट होगा – चाहे वह चमत्कार हो, देरी हो, या विनाश हो। आपकी आत्मा की स्थिति आपके फल की स्थिति को परिभाषित करती है। इसलिए, प्रतिदिन अपनी आत्मा को वचन खिलाएं, विश्वास से भरे शब्द बोलें, और दिव्य निर्देश पर कार्य करें।

आपकी समृद्धि दूसरों की दया पर नहीं छोड़ी गई है – यह आपके हाथों में है! परमेश्वर ने आपको पहले ही सामर्थ दी है कि आप समृद्धि उत्पन्न करे और जीवन में संपूर्णता से जिए।

“परन्तु तू अपने परमेश्वर यहोवा को स्मरण रखना, क्योंकि वही है जो तुझे धन प्राप्त करने का सामर्थ्य देता है।” (व्यवस्थाविवरण 8:18)। जब आप न केवल प्राप्त करने में बल्कि अपने संसाधनों का उपयोग करने में भी उसे स्वीकार करते हैं, तो आपका धन पवित्र और फलवंत हो जाता है। हमेशा अपने आशीषों के उपयोग में परमेश्वर को शामिल करें, क्योंकि समृद्धि दिव्य मार्गदर्शन के द्वारा बढ़ती है।

एक फलवंत जीवन एक निरंतर जीवन भी है। जैसे एक पौधे को जीवित रखने के लिए हर दिन पानी देना ज़रूरी है, वैसे ही आपके विश्वास को भी वचन से निरंतर पोषित होना चाहिए। आप महीने में एक बार पौधे को पानी देकर यह उम्मीद नहीं कर सकते कि वह फलेगा-फूलेगा। इसी तरह, आप कभी-कभार अपने विश्वास को खिला कर लगातार परिणाम की उम्मीद नहीं कर सकते। परमेश्वर आपके विश्वास, आपके देने, आपकी सेवा और आपकी घोषणा में स्थिरता चाहता है। जैसे आप उसके वचन में निहित रहेंगे, आपके फल बने रहेंगे, और आपकी सफलता बढ़ेगी।

हम इस महिमामय वर्ष के समापन के निकट हैं, और हर मौसम के अंत में, परमेश्वर आपसे अपेक्षा करता है कि आप पहले से अधिक फलवंत हों। अपनी बढ़ोतरी के प्रति सचेत रहें – आत्मिक, मानसिक और आर्थिक रूप से। स्रोत से जुड़े रहे, और आप अडिग रहकर फलते-फूलते रहेंगे, हर परिस्थिति में परमेश्वर की महिमा लाएंगे। याद रखें, आपका पत्ता कभी नहीं मुरझाएगा, और आप जो कुछ भी करेंगे वह सफल होगा क्योंकि परमेश्वर की आत्मा खुद आपको निरंतर थामे रखती है।

प्रार्थना:
अनुग्रही पिता, मुझे हर मौसम में फलवंत और उत्पादक बनाने के लिए धन्यवाद। मैं उस वृक्ष के समान फलता-फूलता हूँ जो आपके जीवित जल के पास लगाया गया है। मेरा जीवन निरन्तर फल देता है, और मैं जो कुछ भी करता हूँ उसमें समृद्ध होता हूँ। मुझे अपने वचन और बुद्धिमत्ता से सामर्थ प्रदान करने के लिए धन्यवाद, ताकि मैं निरन्तरता से चल सकूँ। मेरी आत्मा आपकी सामर्थ से जीवित है, मेरे हाथ उत्पादन करने के लिए आशीषित हैं, और मेरा जीवन से आपकी महिमा हो , यीशु के नाम में। आमीन।

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