चोर केवल चोरी करने, घात करने और नाश करने के लिये आता है; मैं इसलिये आया कि वे जीवन पाएं, और बहुतायत से पाएं।
(यूहन्ना 10:10)

क्रिसमस का महान महत्व केवल मसीह के जन्म के चमत्कार में नहीं है, बल्कि उस उद्देश्य में है जिसके लिये उसका जन्म हुआ। स्वयं यीशु ने कहा कि वे हमें जीवन देने आए—केवल जीवित रहने का जीवन नहीं, केवल अस्तित्व नहीं, बल्कि बहुतायत का जीवन। यह जीवन अपने आप में लक्ष्य नहीं था; यह वह दिव्य साधन था जिसके द्वारा मानवता को फिर से परमेश्वर के साथ संगती में लाया जाना था। क्रिसमस इस सच्चाई का उत्सव है कि परमेश्वर समय में उतरा , ताकि मनुष्य फिर से उनके साथ एकता में आ सके।

जो जीवन यीशु लेकर आया, वही परमेश्वर का अपना जीवन है। इसी जीवन के द्वारा संगती संभव हुई। पवित्रशास्त्र कहता है, “परमेश्वर सच्चा है, जिसके द्वारा तुम उसके पुत्र हमारे प्रभु यीशु मसीह की संगती में बुलाए गए हो।(1 कुरिन्थियों 1:9)

संगती केवल कभी-कभार का संबंध नहीं है; यह साझा जीवन, साझा स्वभाव और गहरी निकटता है। मसीह से पहले मनुष्य परमेश्वर से दूर खड़ा था, परन्तु मसीह के द्वारा हमें पास लाया गया—अजनबियों की तरह नहीं, बल्कि परमेश्वर के जीवन में सहभागी बनकर।

प्रेरित यूहन्ना आगे कहता है, “हमारी संगती पिता के साथ, और उसके पुत्र यीशु मसीह के साथ है।”(1 यूहन्ना 1:3)। यही सुसमाचार का हृदय है। यीशु केवल परमेश्वर की ओर से संदेश लेकर नहीं आए; वे हमें परमेश्वर में ले आए। उन्होंने हमें पिता के साथ जोड़ दिया, और आत्मा में उसके साथ एक कर दिया। मसीह के द्वारा परमेश्वर अब कोई दूर का लक्ष्य नहीं रहा जिसे हम खोजते फिरें—वह वो है जिसके साथ हम जीते हैं, चलते हैं, और जिसे व्यक्तिगत रूप से जानते हैं।

जब हम इस सत्य पर मनन करते हैं, तो हमें समझ में आता है कि मसीही जीवन परमेश्वर तक पहुँचने की कोशिश का नाम नहीं है, बल्कि उस संगती में जीने का नाम है जिसे यीशु ने हमारे लिये पहले ही सुरक्षित कर दिया है। यही वह जीवन है जिसे हम अब जीते हैं—पिता के साथ संगति, भरोसे और निकटता का जीवन। यही हमारा उत्सव हो: मसीह हमें परमेश्वर के घर वापस ले आए हैं।

प्रार्थना:
प्रिय पिता, मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आपने प्रभु यीशु को भेजा, जिन्होंने मुझे बहुतायत का जीवन दिया और मुझे आपके साथ संगती में ले आए। धन्यवाद कि मसीह के द्वारा मैं अब दूर नहीं, बल्कि प्रेम और जीवन में आपके साथ जुड़ा हुआ हूँ। मैं इस एकता में आनन्दित होता हूँ और हर दिन आपकी उपस्थिति, आपके जीवन और आपकी संगती के प्रति सचेत रहकर जीता हूँ। मेरा हृदय आप में विश्राम पाता है, और मेरा जीवन आप ही से बहता है। यीशु के नाम में, आमीन।

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