जो बलहीन हो वह भी कहे, मैं बलवन्त हूं(योएल 3:10)।

मसीह में, कमजोरी न तो आपकी पहचान है, न आपकी भाषा, और न ही आपकी तक़दीर। परमेश्वर ने आपको सीमाओं से नहीं, सामर्थ से जीवन जीने के लिए सामर्थी किया है। वचन निर्बल को यह कहने के लिए कहता है कि “मैं बलवन्त हूँ,” जिससे यह स्पष्ट होता है कि सामर्थ विश्वास से भरी घोषणा और सत्य के साथ मेल खाने से सक्रिय होता है। कमजोरी भावनाओं, दबाव, थकान या परिस्थितियों के रूप में सामने आ सकती है, पर उसका आप पर कोई अधिकार नहीं है।

बाइबल में हम पढ़ते हैं कि परमेश्वर की सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है—कमजोरी को स्वीकार करने से नहीं, बल्कि अपने भीतर कार्य कर रही उसकी सामर्थ के आगे समर्पित होने से (संदर्भ. 2 कुरिन्थियों 12:9)। आप उसकी आत्मा के द्वारा अपने भीतरी मनुष्य में सामर्थ से बलवन्त किए गए है, अर्थात दिव्य सामर्थ पहले से ही आपके भीतर वास करती है (संदर्भ. इफिसियों 3:16)। जब आप दृढ़ता से कमजोरी को ‘ना’ कहते है, तो आप प्राकृतिक भावना से नहीं, बल्कि आत्मिक वास्तविकता से कार्य करने का चुनाव करते है।

हार, थकावट या असमर्थता की भाषा को सहन मत करें। सामर्थ बोले। सहनशीलता की घोषणा करें। अनुग्रह का प्रचार करें। हर बार जब आप कमजोरी से इनकार करते है और परमेश्वर के सत्य की पुष्टि करते है, तो आप अपने भीतर कार्य कर रही सामर्थ को एक्टिवेट करते है। सामर्थ अभ्यास करने से बढ़ती है।

जागरूक होकर सामर्थ में जिएं। हर दिन कमजोरी को ‘ना’ कहें और दिव्य सामर्थ को ‘हाँ’ कहें।

प्रार्थना:
प्रिय पिता, मैं हर रूप की कमजोरी को दृढ़ता से ‘ना’ कहता हूँ। मैं घोषणा करता हूँ कि मैं मसीह में बलवन्त हूँ और अपने भीतरी मनुष्य में आपकी आत्मा के द्वारा सामर्थ पाया हुआ हूँ। मैं सीमाओं को बोलने से इनकार करता हूँ और अपने जीवन पर सहनशीलता, सामर्थ और अनुग्रह को बोलता हूँ। मैं ऊर्जावान, प्रभावी और विजयी होकर उस सामर्थ से कार्य करता हूँ जो आपने पहले से मुझे दी है। मैं हर दिन दिव्य सामर्थ और आत्मविश्वास में चलता हूँ। यीशु के नाम में, आमीन।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *