परन्तु सहायक अर्थात् पवित्र आत्मा, जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा और जो कुछ मैंने तुमसे कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा। (यूहन्ना 14:26)

अब जो आप मसीह में हैं, पवित्र आत्मा परमेश्वर की हर संतान को लगातार बुद्धिमता प्रदान करता है। जिस व्यक्ति के पास परमेश्वर का आत्मा नहीं है, उसके पास ज्ञान और अनुभव तो हो सकता है, लेकिन दिव्य बुद्धि के बिना वह अपनी स्वाभाविक समझ तक ही सीमित रहता है और अक्सर परिस्थितियों तथा जीवन के बदलते समय के अनुसार चलता है। लेकिन जो नया जन्म पा चुका है, उसके लिए सब कुछ बदल जाता है।

जिस क्षण आपने प्रभु यीशु को ग्रहण किया, उसी क्षण पवित्र आत्मा आपके भीतर आकर वास करने लगा। उसी समय से उसने आपको सिखाने, आपकी अगुवाई करने और आपको दिव्य बुद्धिमता देने की अपनी अद्भुत सेवकाई आरम्भ कर दी। जैसे-जैसे आप प्रार्थना और परमेश्वर के वचन के अध्ययन के द्वारा उसके साथ लगातार सहभागिता रखते हैं, वह आपकी समझ को बढ़ाता है और आपको आत्मिक परिपक्वता में आगे लेके जाता है।

यह विकास धीरे-धीरे होता है। यह एक ही दिन में नहीं होता, लेकिन उसकी उपस्थिति में बिताया गया हर पल आपकी सोच को बदलता है और आपको परमेश्वर के उद्देश्य के अनुसार जीवन जीने के योग्य बनाता है। इसलिए अपने भीतर और अपने साथ पवित्र आत्मा की उपस्थिति को लगातार स्वीकार कीजिए। स्वयं को उसकी अगुवाई के अधीन रखिए, और वह आपको वह बुद्धिमता, समझ और सामर्थ्य देगा जिससे आप उन सभी महान कार्यों को पूरा कर सकें, जिन्हें परमेश्वर ने आपके जीवन के लिए तैयार किया है।

प्रार्थना:
प्रिय पिता, मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि पवित्र आत्मा मेरे भीतर वास करता है और मुझे लगातार बुद्धि और समझ प्रदान करता है। मैं स्वयं को उसकी अगुवाई के अधीन रखता हूँ और प्रतिदिन आत्मिक परिपक्वता में बढ़ता हूँ। मेरा मन प्रकाशित है, मेरे निर्णय दिव्य बुद्धिमता के द्वारा संचालित होते हैं, और मैं आपके सिद्ध उद्देश्य को पूरा करता हूँ। प्रभु यीशु के नाम में। आमीन!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *