यीशु: वह जो शांति और ज्ञान को गुणित करता है

परमेश्वर के और हमारे प्रभु यीशु की पहचान के द्वारा अनुग्रह और शांति तुम में बहुतायत से बढ़ती जाए। (2 पतरस 1:2) सच्ची शांति समस्याओं की अनुपस्थिति नहीं है – बल्कि यह यीशु की उपस्थिति है। जब मसीह आया, तो दुनिया में शांति आई। लेकिन शांति सिर्फ़ उसके ज्ञान से ही बढ़ती है। जितना ज़्यादा […]
यीशु: निरंतर-बढ़ते अनुग्रह का लेखक

क्योंकि उस की परिपूर्णता से हम सब ने प्राप्त किया अर्थात अनुग्रह पर अनुग्रह। (यूहन्ना 1:16) यीशु के जन्म ने अनुग्रह की शुरुआत को चिह्नित किया – जीवन में केवल एक बार नहीं, बल्कि अनुग्रह पर अनुग्रह, लगातार बढ़ता हुआ। अनुग्रह सिर्फ़ बिना वजह का पक्ष नहीं है; यह दिव्य क्षमता, अलौकिक सहायता और सफल […]
आर्थिक प्रबंधन की बुद्धिमत्ता

बुद्धिमान के घर में उत्तम धन और तेल पाए जाते हैं, परन्तु मूर्ख उन को उड़ा डालता है। (नीतिवचन 21:20) बचत करना सिर्फ़ एक आर्थिक कार्य नहीं है—यह एक आत्मिक अनुशासन है। यह आपकी बोने, निवेश करने और नए स्तर तक पहुंचने की क्षमता को बढ़ाता है। बहुत से विश्वासी आर्थिक ऑर्डर के बिना आर्थिक […]
मसीह मुझ में: परमेश्वर की उपस्थिति का वास

पिता जो मुझमें रहता है, वही काम करता है। (यूहन्ना 14:10) क्रिसमस एक महान सत्य की घोषणा करता है — परमेश्वर मनुष्य बना ताकि परमेश्वर मनुष्यों के अंदर रह सके। यीशु को पवित्र आत्मा की संतान कहा गया क्योंकि पवित्र आत्मा मरियम के ऊपर आया था। और आज, हर नया जन्म ग्रहण करके बना विश्वासी, […]
यीशु: अलौकिक समझ देने वाला

और यह भी जानते हैं, कि परमेश्वर का पुत्र आ गया है और उस ने हमें समझ दी है, कि हम उस सच्चे को पहचानें। (1 यूहन्ना 5:20) आज हम वर्ष के अंतिम महीने में प्रवेश कर चुके हैं, हम वर्ष के सर्वोत्तम समय में प्रवेश कर चुके हैं – क्रिसमस का समय। क्रिसमस केवल […]
वही मत रुकें!

और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए। (रोमियों 12:2) विश्वास एक आत्मिक मसल(muscle)है, और सभी मसल(muscle) की तरह, यह तभी बढ़ती है जब इसका इस्तेमाल किया जाता है। क्षमता तब बढ़ती है जब आप ख़ुद को उस स्तर से आगे खिंचते हैं […]
टारगेट निर्धारित करना

निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है। (फिलिप्पियों 3:14) परमेश्वर के राज्य में प्रगति अभिप्राय होती है। विश्वास तब फलता-फूलता है जब उसे दिशा दी जाती है। इसलिए, टारगेट के बिना एक विश्वासी भटक जाता है, लेकिन टारगेट के […]
आपातकालीन स्थितियों से परे विश्वास

यीशु ने उस को उत्तर दिया, कि परमेश्वर पर विश्वास रखो। (मरकुस 11:22) विश्वास को केवल आपातकालीन स्थिति में निचोड़ा नहीं जाना चाहिए। हालाँकि, कई मसीही, तभी विश्वास पर कार्य करना शुरू करते हैं जब परिस्थितियाँ बर्दाश्त के बाहर हो जाती हैं। वे अचानक से विश्वास की घोषणा करते हैं, ऐलान करते हैं, और दबाव […]
स्थायी इच्छा की सामर्थ

यदि तुम मुझ में बने रहो, और मेरी बातें तुम में बनी रहें तो जो चाहो मांगो और वह तुम्हारे लिये हो जाएगा। (यूहन्ना 15:7) इच्छा विश्वास का जन्मस्थान है। जो आप वास्तव में चाहते हैं वही आपके विश्वास की दिशा बनती है। परन्तु इच्छा को मसीह में बने रहने और उसके वचन को आप […]
दिव्य आर्डर

परन्तु तू अपने परमेश्वर यहोवा को स्मरण रखना, क्योंकि वही है जो तुझे सम्पति प्राप्त करने का सामर्थ्य देता है। (व्यवस्थाविवरण 8:18) कोई भी व्यक्ति अचानक से धन में आगे नहीं बढ़ सकता; वह परमेश्वर के दिव्य आर्डर से आगे बढ़ता है। शुरू से ही, परमेश्वर ने बढ़ोतरी और समृद्धि को नियंत्रित करने वाले सिस्टम […]