पवित्र आत्मा जीवन देता है

और यदि उसी का आत्मा जिस ने यीशु को मरे हुओं में से जिलाया तुम में बसा हुआ है; तो जिस ने मसीह को मरे हुओं में से जिलाया, वह तुम्हारी मरनहार देहों को भी अपने आत्मा के द्वारा जो तुम में बसा हुआ है जिलाएगा। (रोमियों 8:11) आपके भीतर रहने वाला पवित्र आत्मा कोई […]
वह जीवन जिएं जो उसने आपके लिए बनाया है

हे प्रिय, मेरी यह प्रार्थना है; कि जैसे तू आत्मिक उन्नति कर रहा है, वैसे ही तू सब बातों मे उन्नति करे, और भला चंगा रहे। (3 यूहन्ना 1:2) परमेश्वर की इच्छा आपके जीवन के लिए संघर्ष, हार या केवल किसी तरह से जीते रहने का जीवन नही है। उसका वचन स्पष्ट रूप से प्रकट […]
अपने जीवन में वचन को सिद्ध करें

और यदि तुम मसीह के हो, तो इब्राहीम के वंश और प्रतिज्ञा के अनुसार वारिस भी हो। (गलातियों 3:29) एक विश्वासी के रूप में आप परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं से अलग नहीं हैं—आप पूरी तरह मसीह में स्थित हैं। इसका अर्थ है कि अब्राहम से जुड़ी आशीषें अब आपकी हैं। आप परमेश्वर की वाचा का हिस्सा […]
नवीकृत सामर्थ

परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे…” (यशायाह 40:31) नवीकरण का अर्थ है पुनर्जीवित — यानि फिर से जीवित होना। परमेश्वर ने कभी नहीं चाहा कि आप कमज़ोर, खाली या थके हुए रहें। जब आप प्रभु की बाट जोहते हैं, तब एक दिव्य एक्सचेंज […]
ऐसे ही समय के लिए

फिर क्या जाने तुझे ऐसे ही कठिन समय के लिये राजपद मिल गया हो? (एस्तेर 4:14) आपके जीवन का हर मौसम एक ज़िम्मेदारी लेकर आता है। एस्तेर महल में संयोग से नहीं रखी गई थी—परमेश्वर ने उसे सही समय पर एक उद्देश्य के लिए स्थापित किया था। उसी तरह, आज आप जहाँ हैं, वह भी […]
परमेश्वर की योजना का अनुसरण करें

यदि घर को यहोवा न बनाए, तो उसके बनाने वालों को परिश्रम व्यर्थ होगा…” (भजन संहिता 127:1) उद्देश्य होना महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल उद्देश्य होना ही पर्याप्त नहीं है—आपको परमेश्वर की योजना का अनुसरण भी करना चाहिए। यह संभव है कि कोई यह जानता हो कि परमेश्वर ने उसे बुलाया है, फिर भी बेसब्री, अपनी […]
अपने उद्देश्य को खोजें

क्योंकि मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को ढूंढ़ने और उन का उद्धार करने आया है। (लूका 19:10) परमेश्वर जो कुछ भी करता है, वह उद्देश्य के साथ करता है। प्रभु यीशु पृथ्वी पर यूँ ही नही आया था —वह एक उद्देश्य के साथ आया था। वह इसलिए आया कि जीवन बहुतायत से दे (यूहन्ना 10:10), […]
अपने दिव्य कार्य पर केंद्रित रहना

तेरी आंखें साम्हने ही की ओर लगी रहें, और तेरी पलकें आगे की ओर खुली रहें (नीतिवचन 4:25)। परमेश्वर की हर संतान के पास एक दिव्य कार्य है – एक विशिष्ट उद्देश्य और योगदान जो संसार की नींव रखने से पहले पिता द्वारा तैयार किया गया था। महिमा बहुत सारे काम करने में नहीं है, […]
परमेश्वर की योजना से विचलित होने से इनकार करें

जो कोई अपना हाथ हल पर रखकर पीछे देखता है, वह परमेश्वर के राज्य के योग्य नहीं (लूका 9:62)। ध्यान भटकाना शत्रु के सबसे चालाक और प्रभावी हथियारों में से एक है। यह हमेशा पाप या असफलता के माध्यम से नहीं आता—अक्सर यह व्यस्तता, तुलना, या गलत प्राथमिकताओं के कारण आता है। सफलता का रहस्य […]
कमी से इनकार करे

और मेरा परमेश्वर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा। (फिलिप्पियों 4:19) बहुत से लोग लगातार कमी, सीमाओं और अपर्याप्तता के बारे में सोचते रहते हैं, और बिना जाने ही अपने मन को गरीबी की ओर ढाल लेते हैं। लेकिन परमेश्वर ने […]