पीछे मत हटे

और मेरा सत्यनिष्ठ जन विश्वास से जीवित रहेगा, और यदि वह पीछे हट जाए तो मेरा मन उस से प्रसन्न न होगा। (इब्रानियों 10:38) बहुत से ऐसे लोग होते हैं जो परमेश्वर के साथ अपनी यात्रा, बहुत उत्साह के साथ शुरू करते हैं परन्तु उसी उत्साह के साथ इसे जारी नही रखते। जब वे नया […]
विश्वास की अच्छी लड़ाई अंत तक लड़े

विश्वास की अच्छी कुश्ती लड़; और उस अनन्त जीवन को धर ले, जिस के लिये तू बुलाया गया (1 तीमुथियुस 6:12) मसीही जीवन निष्क्रिय नहीं है; यह विश्वास का जीवन है, जिसे सचेत रूप से प्रयोग करना और बनाए रखना होता है। पवित्रशास्त्र इसे अच्छी लड़ाई कहता है, क्योंकि मसीह में विजय पहले ही सुनिश्चित […]
हर परिस्थिति में परमेश्वर का वचन बोलें

जीभ के वश में मृत्यु और जीवन दोनों होते हैं, और जो उसे काम में लाना जानता है वह उसका फल भोगेगा (नीतिवचन 18:21)। मसीह में, आपके शब्द साधारण नहीं होते—वे आत्मिक अधिकार से भरे होते हैं। परमेश्वर ने आपको अपना वचन इसलिए दिया है ताकि आप जिस परिस्थिति का सामना करें, उसमें उसकी वास्तविकता […]
हालातों को देखकर विचलित न हों

क्योंकि हम रूप को देखकर नहीं, पर विश्वास से चलते हैं (2 कुरिंथियों 5:7)। मसीह में परमेश्वर की संतान होने के नाते आप , आपको जो दिखाई देता है उसके अनुसार जीने के लिए नहीं, बल्कि जो परमेश्वर पहले ही बोल चुका है उसके अनुसार जीने के लिए बुलाये गये है। हालात भले ही मुश्किल, […]
चिंता करने से इनकार करें

किसी भी बात की चिन्ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं (फिलिप्पियों 4:6)। चिंता विश्वास से ध्यान हटाने का एक साधन है और शत्रु की एक सूक्ष्म चाल है, जिसका उद्देश्य परमेश्वर की पर्याप्तता से आपका ध्यान भटकाना […]
मेरी मदद प्रभु से आती है

मैं अपनी आंखें पर्वतों की ओर लगाऊंगा,जहाँ से मुझे मदद मिलेगी। मुझे मदद यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है(भजन संहिता 121:1-2)। मसीह में परमेश्वर की संतान होने के नाते, आपकी मदद लोगों, सिस्टम या परिस्थितियों से नहीं आती—आपकी मदद प्रभु से आती है। परमेश्वर ही आपका स्रोत है, […]
परमेश्वर द्वारा दिए गए लक्ष्यों पर अपना ध्यान केंद्रित करें

जहां दर्शन की बात नहीं होती, वहां लोग निरंकुश हो जाते हैं(नीतिवचन 29:18)। परमेश्वर ने आपके जीवन के लिए विशेष लक्ष्य, दिशा और उद्देश्य निर्धारित किए हैं। यह अत्यंत आवश्यक है कि आप उस बात पर अपना ध्यान केंद्रित करें जिसे परमेश्वर ने आपकी आत्मा में रखा है, और उसी पर स्थिर व केंद्रित बने […]
परमेश्वर की सामर्थ के प्रवाह का हर दिन अभ्यास करें

क्योंकि परमेश्वर का राज्य बातों में नहीं, परन्तु सामर्थ में है (1 कुरिंथियों 4:20)। परमेश्वर ने कभी यह नहीं चाहा कि उसकी संताने केवल ज्ञान में बिना किसी प्रदर्शन के जिएं। राज्य केवल शब्दों के द्वारा ही नहीं, बल्कि सामर्थ के द्वारा प्रकट होता है। इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि आप परमेश्वर की सामर्थ […]
अपने देश के लिए प्रार्थना करें

अब मैं सब से पहिले यह उपदेश देता हूं, कि बिनती, और प्रार्थना, और निवेदन, और धन्यवाद, सब मनुष्यों के लिये किए जाएं। राजाओं और सब ऊंचे पद वालों के निमित्त इसलिये कि हम विश्राम और चैन के साथ सारी भक्ति और गम्भीरता से जीवन बिताएं (1 तीमुथियुस 2:1–2)। परमेश्वर ने विश्वासियों को प्रार्थना के […]
अपने जीवन में सामर्थ के कार्य को सामान्य बनाए

परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ पाओगे (प्रेरितों के काम 1:8)। यह बहुत आवश्यक है कि आप हर दिन अपने मन का नवीनीकरण करें और मसीह में अपनी वर्तमान वास्तविकता के बारे में स्वयं से प्रचार करें। आप उसी समय में जी रहे हैं जिसे पुराने समय के भविष्यवक्ता देखने की […]