असीमित संसाधन

limitless resources in Christ divine supply 2 Corinthians 9:8

और परमेश्वर सब प्रकार का अनुग्रह तुम्हें बहुतायत से दे सकता है जिस से हर बात में और हर समय, सब कुछ, जो तुम्हें आवश्यक हो, तुम्हारे पास रहे, और हर एक भले काम के लिये तुम्हारे पास बहुत कुछ हो(2 कुरिंथियों 9:8)। मसीह यीशु में आप कमी के स्तर से नहीं, बल्कि प्रचुरता और […]

सिर्फ़ जोश ही काफी नहीं है

Woman reading the Bible representing faith rooted in knowledge and revelation instead of blind zeal

कि उन को परमेश्वर के लिये धुन रहती है, परन्तु बुद्धिमानी(ज्ञान) के साथ नहीं। (रोमियों 10:2) ज्ञान के बिना जुनून विनाश की ओर ले जाता है। बहुत से लोग सच्चे मन से परमेश्वर की सेवा करना चाहते हैं, लेकिन अस्थिरता में चलते हैं, क्योंकि उनका जोश सत्य पर आधारित नहीं होता। जो बात लॉजिकल लगती […]

प्रेम में चलना ही सत्य में चलना है

Silhouette of a believer standing before a glowing heart symbolizing walking in love and truth in Christ

क्योंकि जो दूसरे से प्रेम रखता है, उसी ने व्यवस्था पूरी की है। (रोमियों 13:8) प्रेम के बिना सत्य कठोर धर्म बन जाता है। प्रेम के बिना मसीहियत केवल एक और मनुष्य-निर्मित धर्म बनकर रह जाता है—जो परमेश्वर के हृदय को नज़रअंदाज़ करते हुए शरीर को संतुष्ट करने के लिए बनाया गया है। प्रभु यीशु […]

सत्य का प्रदर्शन

manifestation of truth John 17:17 living the Word of God

सत्य के द्वारा उन्हें पवित्र कर: तेरा वचन सत्य है। (यूहन्ना 17:17) यह हमारे प्रदर्शन का साल है, और प्रदर्शन का आरंभ सत्य से होता है। सत्य कोई विचार नहीं है, और न ही यह परंपरा है। सत्य प्रकट की गई वास्तविकता है, जिसका यीशु मसीह के द्वारा अनावरण हुआ। जब तक प्रभु यीशु नहीं […]

आप किसकी बात सुन रहे हैं?

who are you listening to Luke 8:18 spiritual discernment

इसलिये चौकस रहो, कि तुम किस रीति से सुनते हो… (लूका 8:18) आपका जीवन हमेशा उसी आवाज़ की दिशा में आगे बढ़ेगा, जिसका आप अनुसरण करते हैं। बहुत से विश्वासी परमेश्वर का वचन सुनते तो हैं, लेकिन विपरीत आवाजों को सुनकर उसकी सामर्थ को निष्प्रभावी कर देते हैं। जिसका परिणाम अस्थिरता होता है—विश्वास क्षण भर […]

अपने मन को नवीनीकृत करने की ज़िम्मेदारी

renewing the mind Romans 12:2 biblical transformation

और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए… (रोमियों 12:2) नया साल अपने आप नए परिणाम नहीं लाता। कई लोग नए साल में उत्साह और अपेक्षा के साथ प्रवेश करते हैं, लेकिन पुराने पैटर्न दोहराते हुए साल के अंत में निराश हो जाते […]

आपके जीवन की स्वतंत्रता

independence of life in Christ John 5:26 divine life

क्योंकि जिस रीति से पिता अपने आप में जीवन रखता है, उसी रीति से उस ने पुत्र को भी यह अधिकार दिया है कि अपने आप में जीवन रखे (यूहन्ना 5:26)। बाइबल मसीह यीशु में हमें प्राप्त जीवन के बारे में एक गहरी और अद्भुत सच्चाई प्रकट करती है। जिस तरह पिता खुद में जीवन […]

इस वो समय के प्रबंधक

Stewards of the hour showing manifestation of the sons of God in a prophetic season

क्योंकि सृष्टि बड़ी आशाभरी दृष्टि से परमेश्वर के पुत्रों के प्रगट होने की बाट जोह रही है। (रोमियों 8:19) हर दिव्य समय, एक दिव्य अपेक्षा लेकर आता है। जिस समय में हम हैं, वह कोई संयोग नहीं है; वह उद्देश्यपूर्ण और भविष्यवाणी के अनुसार है। परमेश्वर के पुत्रों का प्रकट होना इस युग के अंधकार […]

असाइनमेंट पर पुत्र

Man holding the Holy Bible symbolizing yielded sons carrying divine assignment and kingdom responsibility

हे भाइयों, कहीं ऐसा न हो, कि तुम अपने आप को बुद्धिमान समझ लो; इसलिये मैं नहीं चाहता कि तुम इस भेद से अनजान रहो, कि जब तक अन्यजातियां पूरी रीति से प्रवेश न कर लें, तब तक इस्त्राएल का एक भाग ऐसा ही कठोर रहेगा। (रोमियों 11:25) आत्मिक परिपक्वता केवल व्यक्तिगत कम्फर्ट के लिए […]

स्वर्ग के कार्य करने का तरीका

Heaven’s modus operandi showing spiritual authority, maturity, and dominion in Christ

मैं यह कहता हूं, कि वारिस जब तक बालक है, यद्यपि सब वस्तुओं का स्वामी है, तौभी उस में और दास में कुछ भेद नहीं। परन्तु पिता के ठहराए हुए समय तक रक्षकोंऔर भण्डारियों के वश में रहता है। वैसे ही हम भी, जब बालक थे, तो संसार की आदि शिक्षा के वश में होकर […]