परमेश्वर के प्रति आपकी चेतना: जीवन का निर्माता!
अन्तिम आदम, जीवनदायक आत्मा बना। (1 कुरिन्थियों 15:45) परमेश्वर ही जीवन का मूल स्रोत है। जीवन उसी में है, उसी से है, और उसी के द्वारा है। परमेश्वर के बिना जीवन असंभव है। बाइबल हमें दिखाती है कि यीशु, दूसरा आदम, जीवन देने वाला आत्मा बन गया। परमेश्वर की संतान होने के नाते, आप अपने […]
अपने शब्दों को व्यर्थ न बनाये
मूर्खतापूर्ण, अज्ञानतापूर्ण विवादों में न पड़ो; क्योंकि तुम जानते हो कि वे झगड़े उत्पन्न करते हैं। (2 तीमुथियुस 2:23) पिछले कुछ दिनों से हम सीख रहे हैं कि हमारे शब्द बहुत महत्वपूर्ण हैं। हम कैसे बोलते हैं और क्या बोलते हैं, यह हमारे जीवन की दिशा को निर्धारित करता है। इसलिए, हमें कभी भी बेकार […]
दिव्य चेतना
मेरे ज्ञान के न होने से मेरी प्रजा नाश हो गई… (होशे 4:6आ) क्या आपने हमारे मुख्य वर्स में कुछ नोटिस किया? परमेश्वर यह नहीं कह रहा है कि पापियों का नाश हो गया है, बल्कि वह अपने पवित्र लोगों की बात कर रहा है। यदि वह पवित्र लोगों की बात नहीं कर रहा होता, […]
दिव्य जीवन
जिस के पास पुत्र है, उसके पास जीवन है; और जिस के पास परमेश्वर का पुत्र नहीं, उसके पास जीवन भी नहीं है। (1 यूहन्ना 5:12) मसीह में, हमें दिव्य जीवन प्राप्त हुआ है। इस जीवन के लिए ग्रीक शब्द “ज़ोए” है, इस शब्द का अनुवाद करते समय, इसके कई अलग-अलग अर्थ मिल सकते हैं। […]
अपने भीतरी मनुष्य को मजबूत बनाये
उसकी आत्मा से अपने भीतरी मनुष्य में सामर्थ पाकर बलवन्त होते जाओ (इफिसियों 3:16) मनुष्य एक आत्मा है और वह शरीर में रहता है। अपने बारे में, अपने भीतर के मनुष्य के बारे में शिक्षित होना बहुत महत्वपूर्ण है। परमेश्वर ही जीवन का स्रोत है, और जब आदम ने पाप किया, तो वह जीवन से […]
परमेश्वर की आवाज़ पर मनन करना
व्यवस्था की यह पुस्तक तेरे चित्त से कभी न उतरने पाए, इसी में दिन रात ध्यान दिए रहना, इसलिये कि जो कुछ उस में लिखा है उसके अनुसार करने की तू चौकसी करे; क्योंकि ऐसा ही करने से तेरे सब काम सफल होंगे, और तू प्रभावशाली होगा। (यहोशू 1:8) परमेश्वर की आवाज़ सिर्फ़ दिव्य निर्देश […]
प्रार्थना में परमेश्वर की आवाज़ सुनना
मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं; मैं उन्हें जानता हूँ, और वे मेरे पीछे पीछे चलती हैं। (यूहन्ना 10:27) प्रार्थना हमारे स्वर्गीय पिता के साथ हमारा दिव्य कम्युनिकेशन है। यह केवल अपनी ज़रूरतो को प्रस्तुत करने या सहायता मांगने का क्षण नहीं है – प्रार्थना परमेश्वर के साथ कम्युनिकेशन, परामर्श और संगति का एक पवित्र […]
यूहन्ना और जुडास के जीवन से सबक़
उस ने यह बात इसलिये न कही, कि उसे कंगालों की चिन्ता थी, परन्तु इसलिये कि वह चोर था और उसके पास उन की थैली रहती थी, और उस में जो कुछ डाला जाता था, वह निकाल लेता था। (यूहन्ना 12:6) यूहन्ना और यहूदा इस्करियोती (जुडास), यीशु के बारह शिष्यों में से थे। हालाँकि, दोनों […]
सत्य को मोल लेना
सच्चाई को मोल लेना, बेचना नहीं; और बुद्धि और शिक्षा और समझ को भी मोल लेना। (नीतिवचन 23:23) परमेश्वर सबसे अच्छा व्यक्तित्व है हमें यह सिखाने के लिए कि जीवन में सफल कैसे हो सकते हैं| परमेश्वर की बुद्धिमता कुछ समय दुनिया के लिए बेवकूफी होती है| यह मनुष्य के समझ से परे है और […]
यीशु के साथ हमारी एकता और संगति
परमेश्वर सच्चा है, और उसने हमें अपने पुत्र हमारे प्रभु यीशु मसीह की संगति में बुलाया है (1 कुरिन्थियों 1:9)। यीशु मसीह की संगति में बुलाए जाने का अर्थ है कि हम उसके साथ एकता में आ गए हैं। इसका अर्थ है कि हमें उसकी श्रेणी में लाया गया है, और अब हम उसके साथ […]