प्रभु यीशु को अपना मानें

हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। (मत्ती 11:28) आप अपने जीवन में प्रभु यीशु को कैसे पहचानते हैं, यह इस बात को निर्धारित करता है कि आपका उसके साथ कैसा रिश्ता हैं। यह एक बात है कि आप जानते हैं कि यीशु प्रभु हैं, […]
आप परमेश्वर की भविष्यवाणी की अभिव्यक्ति हैं

आकाश और पृथ्वी टल जाएंगे, परन्तु मेरी बातें कभी न टलेंगी। (मत्ती 24:35) क्या आपने कभी महसूस किया है कि आपका जीवन रैंडम नहीं है? आप पृथ्वी पर परमेश्वर की भविष्यवाणी की योजना की अभिव्यक्ति हैं। आपके अस्तित्व में उद्देश्य है, और आपका जीवन उस बात को प्रकट करने के लिए है जो परमेश्वर पहले […]
गलत क्लबों से बाहर निकलें

धोखा न खाना, बुरी संगति अच्छे चरित्र को बिगाड़ देती है। (1 कुरिन्थियों 15:33) लोग अनजाने में कुछ अदृश्य ‘क्लबों’ में शामिल हो जाते हैं—कंजूसों का क्लब, शिकायतकर्ताओं का क्लब, डरपोकों का क्लब, या संदेह करने वालों का क्लब। इनमें से हर एक मानसिक और आत्मिक क्लब लोगों को सीमाओं में फंसा देते है। कुछ […]
परमेश्वर के अनुग्रह का मूल्य समझें!

और हम जो उसके सहकर्मी हैं यह भी समझाते हैं, कि परमेश्वर का अनुग्रह जो तुम पर हुआ, व्यर्थ न रहने दो। (2 कुरिन्थियों 6:1) अनुग्रह परमेश्वर का आपके प्रति अकारण पक्ष है। अनुग्रह परमेश्वर की अलौकिक क्षमता है जो आप में और आपके माध्यम से कार्य करती है। लेकिन अनुग्रह को कभी भी हल्के […]
प्रभु में अपनी सामर्थ को नवीनीकृत करें!

परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे। (यशायाह 40:31) प्रभु की प्रतीक्षा करना निष्क्रिय नहीं है; यह विश्वास, आराधना और भरोसे की एक सक्रिय अवस्था है। उसकी प्रतीक्षा करना निष्क्रियता नहीं है — […]
आत्मा से जीना: फलवंत स्थिरता का जीवन

यदि हम आत्मा के द्वारा जीवित हैं, तो आत्मा के अनुसार चलें भी। (गलातियों 5:25) पिछले दिनों में हमने यह जाना कि सच्ची सफलता और फलवंतता आत्मा से प्रवाहित होती है। परमेश्वर ने आपके भीतर सृजन करने, समृद्ध होने और दिव्य उत्कृष्टता में जीवन जीने की सामर्थ रखी है। अपनी आत्मिक क्षमताओं की खोज करने […]
अपने शब्दों से आगे बढ़ना

जीभ के वश में मृत्यु और जीवन दोनों होते हैं, और जो उसे काम में लाना जानता है वह उसका फल भोगेगा (नीतिवचन 18:21)। आपके शब्द साधारण नहीं हैं—वे आत्मिक शक्तियाँ हैं जो आपके तक़दीर को आकार देती हैं। आपके जीवन की दिशा आपके शब्दों की दिशा का अनुसरण करती है। हर बार जब आप […]
अपने दैनिक जीवन में उसके वचन के अनुसार जिएँ

मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है जीवित रहेगा। (मत्ती 4:4) परमेश्वर का वचन केवल आपको प्रेरित या उत्साहित करने के लिए ही नहीं है—यह जीने के लिए है। इस समय में, जब आप बुनियादी लेकिन सामर्थी सत्य सीख रहे हैं, तो यह महत्वपूर्ण […]
दिव्य जीवन
जिस के पास पुत्र है, उसके पास जीवन है; और जिस के पास परमेश्वर का पुत्र नहीं, उसके पास जीवन भी नहीं है। (1 यूहन्ना 5:12) मसीह में, हमें दिव्य जीवन प्राप्त हुआ है। इस जीवन के लिए ग्रीक शब्द “ज़ोए” है, इस शब्द का अनुवाद करते समय, इसके कई अलग-अलग अर्थ मिल सकते हैं। […]
प्रार्थना में परमेश्वर की आवाज़ सुनना
मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं; मैं उन्हें जानता हूँ, और वे मेरे पीछे पीछे चलती हैं। (यूहन्ना 10:27) प्रार्थना हमारे स्वर्गीय पिता के साथ हमारा दिव्य कम्युनिकेशन है। यह केवल अपनी ज़रूरतो को प्रस्तुत करने या सहायता मांगने का क्षण नहीं है – प्रार्थना परमेश्वर के साथ कम्युनिकेशन, परामर्श और संगति का एक पवित्र […]