उसने आपको सशक्त बनाया है और सब कुछ प्रदान किया है

क्योंकि हमारी लड़ाई के हथियार शारीरिक नहीं, पर गढ़ों को ढा देने के लिये परमेश्वर के द्वारा सामर्थी हैं। (2 कुरिन्थियों 10:4) परमेश्वर ने आपको असहाय नहीं छोड़ा है। उसने आपको सामर्थ प्रदान की है और आपको शक्तिशाली आत्मिक हथियार प्रदान किए हैं। 2 कुरिन्थियों 10:4 में, बाइबल यह स्पष्ट करती है कि हमारे हथियार […]

अपने भोजन के प्रति सावधान रहें

“सब से अधिक अपने मन की रक्षा कर; क्योंकि जीवन का मूल स्रोत वही है।” (नीतिवचन 4:23) हमारा भोजन केवल वही नहीं है जो हम अपने मुँह से खाते हैं। वास्तव में, हम अपने मन और आत्मा को क्या खिलाते हैं – जो हम सुनते हैं, पढ़ते हैं, देखते हैं और जिस पर मनन करते […]

आपको छुटकारे की ज़रूरत नही है

और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिस ने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में समभागी हों। उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया। (कुलुस्सियों 1:12-13) अगर आप नए जन्में हैं, तो आपको शैतान की शक्ति से पहले ही छुटकारा […]

डुनामिस की ओर प्रबुद्ध किया जाना

परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे (प्रेरितों के काम 1:8)। सामर्थ शब्द का शाब्दिक अर्थ है नियंत्रणकारी प्रभाव, श्रेष्ठता या अधिकार का होना। हालाँकि, हमारे मुख्य वर्स में ‘सामर्थ’ शब्द का गहरा अर्थ है, […]

दिव्य चेतना

मेरे ज्ञान के न होने से मेरी प्रजा नाश हो गई… (होशे 4:6आ) क्या आपने हमारे मुख्य वर्स में कुछ नोटिस किया? परमेश्वर यह नहीं कह रहा है कि पापियों का नाश हो गया है, बल्कि वह अपने पवित्र लोगों की बात कर रहा है। यदि वह पवित्र लोगों की बात नहीं कर रहा होता, […]

प्रभु के राज्य का जीवन

उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया। (कुलुस्सियों 1:13) मसीह में हमें प्रभु के राज्य के जीवन में बुलाया गया है, एक ऐसा जीवन जहाँ हर दिन चमत्कार और अलौकिकता का अंतहीन प्रवाह होता है। जब यीशु पृथ्वी पर था, तो उसने राज्य का जीवन जिया। […]

उसकी सामर्थ वास्तविक है, वहम नहीं

मैं इसी कारण उस पिता के साम्हने घुटने टेकता हूं, जिस से स्वर्ग और पृथ्वी पर, हर एक घराने का नाम रखा जाता है। कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें यह दान दे, कि तुम उसके आत्मा से अपने भीतरी मनुष्य में सामर्थ पाकर बलवन्त होते जाओ (इफिसियों 3:14-16)। हमारे मुख्य वर्स […]

परमेश्वर की आवाज़ पर मनन करना

व्यवस्था की यह पुस्तक तेरे चित्त से कभी न उतरने पाए, इसी में दिन रात ध्यान दिए रहना, इसलिये कि जो कुछ उस में लिखा है उसके अनुसार करने की तू चौकसी करे; क्योंकि ऐसा ही करने से तेरे सब काम सफल होंगे, और तू प्रभावशाली होगा। (यहोशू 1:8) परमेश्वर की आवाज़ सिर्फ़ दिव्य निर्देश […]

मूसा के जीवन से सबक

मूसा तो उसके सारे घर में सेवक की नाईं विश्वास योग्य रहा, कि जिन बातों का वर्णन होने वाला था, उन की गवाही दे। (इब्रानियों 3:5) मूसा को 80 वर्ष की आयु में मिस्र के फिरौन के हाथों से इस्राएल को छुड़ाने के लिए परमेश्वर ने बुलाया था। एक ऐसी उम्र जिसे कई लोग अपने […]

सीखने के प्रति आपका दृष्टिकोण

धन्य है वह मनुष्य जो दुष्टों की युक्ति पर नहीं चलता, न पापियों के मार्ग में खड़ा होता, न ठट्ठा करनेवालों की मण्डली में बैठता। परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता है, और उसकी व्यवस्था पर रात दिन मनन करता रहता है। वह उस वृक्ष के समान है जो बहती नदियों के […]