डुनामिस की ओर प्रबुद्ध किया जाना

परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे (प्रेरितों के काम 1:8)। सामर्थ शब्द का शाब्दिक अर्थ है नियंत्रणकारी प्रभाव, श्रेष्ठता या अधिकार का होना। हालाँकि, हमारे मुख्य वर्स में ‘सामर्थ’ शब्द का गहरा अर्थ है, […]

दिव्य जीवन

जिस के पास पुत्र है, उसके पास जीवन है; और जिस के पास परमेश्वर का पुत्र नहीं, उसके पास जीवन भी नहीं है। (1 यूहन्ना 5:12) मसीह में, हमें दिव्य जीवन प्राप्त हुआ है। इस जीवन के लिए ग्रीक शब्द “ज़ोए” है, इस शब्द का अनुवाद करते समय, इसके कई अलग-अलग अर्थ मिल सकते हैं। […]

परमेश्वर की आवाज़ पर मनन करना

व्यवस्था की यह पुस्तक तेरे चित्त से कभी न उतरने पाए, इसी में दिन रात ध्यान दिए रहना, इसलिये कि जो कुछ उस में लिखा है उसके अनुसार करने की तू चौकसी करे; क्योंकि ऐसा ही करने से तेरे सब काम सफल होंगे, और तू प्रभावशाली होगा। (यहोशू 1:8) परमेश्वर की आवाज़ सिर्फ़ दिव्य निर्देश […]

परमेश्वर के अभिषिक्‍त जन के ज़रिए परमेश्वर की आवाज़ सुनना

और वे सवेरे उठकर तकोआ के जंगल की ओर चल दिए; और जब वे चल रहे थे, तब यहोशापात खड़ा होकर कहने लगा, हे यहूदियो, और हे यरूशलेम के निवासियो, मेरी सुनो; अपने परमेश्वर यहोवा पर विश्वास रखो, तब तुम स्थिर रहोगे; उसके नबियों की प्रतीत करो, तब तुम कृतार्थ होगे। (2 इतिहास 20:20) परमेश्वर […]

परमेश्वर की आवाज़ सम्पूर्ण समाधान लाती है

और यहोवा ने यहोशू से कहा, सुन, मैं यरीहो को, और उसके राजा को, और शूरवीरों को तेरे हाथ में कर देता हूँ। (यहोशू 6:2) जब परमेश्वर की आवाज़ आपके लिए रणनीति लाती है, तो आपको हर विपरीत परिस्थिति के लिए संपूर्ण समाधान प्राप्त होता है। परमेश्वर सब कुछ जानता है। उसकी आवाज़ हमें सम्पूर्ण […]

परमेश्वर की आवाज़ उद्देश्य लाती है

यहोवा की वाणी मेघों के ऊपर सुन पड़ती है; प्रतापी ईश्वर गरजता है, यहोवा घने मेघों के ऊपर रहता है। (भजन संहिता 29:3) परमेश्वर की आवाज़ आपके जीवन का उद्देश्य आपके लिए परिभाषित करती है। यह आपको आपके बुलाहट के सटीक कारण का ज्ञान देता है। जब उसकी आवाज़ उसकी आत्मा के माध्यम से, उसके […]

परमेश्वर की आवाज़ और आपकी तत्परता

चाहे तुम दाहिनी ओर मुड़ो, चाहे बाईं ओर, तुम्हारे कानों को पीछे से यह शब्द सुनाई देगा, “मार्ग यही है, इसी पर चलो।” (यशायाह 30:21) जब परमेश्वर की आवाज़ कोई निश्चित आज्ञा और निर्देश देती है, तो आपको उस पर कार्य करने के लिए तत्पर होना चाहिए। आप उसकी आज्ञा को टाल नहीं सकते ना […]

यहोशू के जीवन से सबक

तेरे जीवन भर कोई तेरे साम्हने ठहर न सकेगा; जैसे मैं मूसा के संग रहा वैसे ही तेरे संग भी रहूंगा; और न तो मैं तुझे धोखा दूंगा और न तुझ को छोडूंगा। इसलिये हियाव बान्धकर दृढ़ हो जा; क्योंकि जिस देश के देने की शपथ मैं ने इन लोगों के पूर्वजों से खाई थी […]

नहेमायाह के जीवन से सबक।

शहरपनाह के बनाने वाले और बोझ के ढोने वाले दोनों भार उठाते थे, अर्थात एक हाथ से काम करते थे और दूसरे हाथ से हथियार पकड़े रहते थे(नहेमायाह 4:17)। नहेमायाह फारस के राजा का पिलानेहार था। जब उसे यरूशलेम की स्थिति, यरूशलेम के लोगों और मंदिर के बारे में पता चला, उसने यरूशलेम की दीवारों […]

यूसुफ के जीवन से सबक

और इस्राएल अपने सब पुत्रों से बढ़के यूसुफ से प्रीति रखता था, क्योंकि वह उसके बुढ़ापे का पुत्र था: और उसने उसके लिये रंग बिरंगा अंगरखा बनवाया। (उत्पत्ति 37:3) यूसुफ, याकूब (इज़राइल) के बारह पुत्रों में से एक था और उसकी पसंदीदा पत्नी से पैदा हुआ पहला पुत्र था। यूसुफ, याकूब का पसंदीदा पुत्र था […]