यीशु: वह जो हमें महिमा से महिमा में बदलता है

परन्तु जब हम सब के उघाड़े चेहरे से प्रभु का प्रताप इस प्रकार प्रगट होता है, जिस प्रकार दर्पण में, तो प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्वी रूप में अंश अंश कर के बदलते जाते हैं। (2 कुरिन्थियों 3:18) क्रिसमस परमेश्वर के प्रकट होने का उत्सव है — मसीह, जिसे देखा, छुआ […]
यीशु: निरंतर-बढ़ते अनुग्रह का लेखक

क्योंकि उस की परिपूर्णता से हम सब ने प्राप्त किया अर्थात अनुग्रह पर अनुग्रह। (यूहन्ना 1:16) यीशु के जन्म ने अनुग्रह की शुरुआत को चिह्नित किया – जीवन में केवल एक बार नहीं, बल्कि अनुग्रह पर अनुग्रह, लगातार बढ़ता हुआ। अनुग्रह सिर्फ़ बिना वजह का पक्ष नहीं है; यह दिव्य क्षमता, अलौकिक सहायता और सफल […]
सही अंगीकार की सामर्थ

क्योंकि सत्यनिष्ठा के लिये मन से विश्वास किया जाता है, और उद्धार के लिये मुंह से अंगीकार किया जाता है। (रोमियों 10:10) आपका जीवन आपके घोषणा के स्तर पर ऊपर या नीचे जाता है। बहुत से विश्वासी परमेश्वर के साथ चलने में संघर्ष करते हैं, इसलिए नहीं कि उन में विश्वास की कमी है, बल्कि […]
सही मायने में देने से उत्पन्न होने वाली सामर्थ

परन्तु बात तो यह है, कि जो थोड़ा बोता है वह थोड़ा काटेगा भी; और जो बहुत बोता है, वह बहुत काटेगा। (2 कुरिन्थियों 9:6) देना कोई आर्थिक कार्य नहीं है – यह एक आत्मिक कार्य है। असली देना प्रकटीकरण से उत्पन्न होता है, न कि रूटीन से। जब आप कुछ ऐसा बोते हैं जिसमें […]
गलत क्लबों से बाहर निकलें

धोखा न खाना, बुरी संगति अच्छे चरित्र को बिगाड़ देती है। (1 कुरिन्थियों 15:33) लोग अनजाने में कुछ अदृश्य ‘क्लबों’ में शामिल हो जाते हैं—कंजूसों का क्लब, शिकायतकर्ताओं का क्लब, डरपोकों का क्लब, या संदेह करने वालों का क्लब। इनमें से हर एक मानसिक और आत्मिक क्लब लोगों को सीमाओं में फंसा देते है। कुछ […]
परमेश्वर के अनुग्रह का मूल्य समझें!

और हम जो उसके सहकर्मी हैं यह भी समझाते हैं, कि परमेश्वर का अनुग्रह जो तुम पर हुआ, व्यर्थ न रहने दो। (2 कुरिन्थियों 6:1) अनुग्रह परमेश्वर का आपके प्रति अकारण पक्ष है। अनुग्रह परमेश्वर की अलौकिक क्षमता है जो आप में और आपके माध्यम से कार्य करती है। लेकिन अनुग्रह को कभी भी हल्के […]
एक नवीनीकृत मन की सामर्थ

और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए। (रोमियों 12:2) परिवर्तन एक बार होने वाली घटना नहीं है; यह आपके मन को परमेश्वर के वचन से नवीनीकृत करने की एक निरंतर प्रक्रिया है। परिवर्तन मन से शुरू होता है। उद्धार के बाद भी, […]
भावनाओं से ऊपर विश्वास

क्योंकि हम रूप को देखकर नहीं, पर विश्वास से चलते हैं। (2 कुरिन्थियों 5:7) विश्वास आत्मा की भाषा है, जबकि भावनाएँ शरीर से संबंध रखती हैं। विश्वास उस पर आधारित नहीं है जो आप देखते हैं या महसूस करते हैं, बल्कि उस पर आधारित है जो परमेश्वर ने कहा है। भावनाएँ बदलती रहती हैं, परन्तु […]
आत्मिक जायंट बनें

क्योंकि सृष्टि बड़ी आशाभरी दृष्टि से परमेश्वर के पुत्रों के प्रगट होने की प्रतीक्षा कर रही है। (रोमियों 8:19) पृथ्वी ने विभिन्न प्रकार के जायंट जीवों को देखा है। बाइबल में प्राचीन समय के गोलियत जैसे शारीरिक जायंट का वर्णन किया गया है। आधुनिक दिनों में, हम मानसिक जायंट का सामना करते हैं। हालाँकि, आज […]
एक जलता हुआ और चमकता प्रकाश

“वह तो जलता और चमकता हुआ दीपक था; और तुम्हें कुछ देर तक उस की ज्योति में, मगन होना अच्छा लगा।” (युहन्ना 5:35) युहन्ना, बपतिस्मा दाता, का कितना अनोखा वर्णन है; मास्टर के खुद के होठों से आता हुआ!आपको पता है, हर प्रकाश एक जलता और चमकता हुआ प्रकाश नहीं होता। कुछ शांत और मंद […]