महानता वही है जो आप बनाये हुए हैं!

परन्तु जब कि परमेश्वर का आत्मा तुम में बसता है, तो तुम शारीरिक दशा में नहीं, परन्तु आत्मिक दशा में हो। (रोमियों 8:9) बड़ा होना और महान होना—इन दोनों में फर्क होता है। बड़ा होना एक पोजीशन है। और महानता एक स्वभाव है। पोजीशन बदल सकता है। टाइटल फीका पड़ सकता हैं। लेकिन महानता? वह […]
अपने तथ्यों की पहचान से मत जिए

मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया हूं, और अब मैं जीवित न रहा, पर मसीह मुझ में जीवित है: और मैं शरीर में अब जो जीवित हूं तो केवल उस विश्वास से जीवित हूं, जो परमेश्वर के पुत्र पर है, जिस ने मुझ से प्रेम किया, और मेरे लिये अपने आप को दे […]
कुछ भी आकस्मिक नहीं है

पर हे परमेश्वर के जन, तू इन बातों से भाग; और सत्यनिष्ठा, भक्ति, विश्वास, प्रेम, धीरज, और नम्रता का पीछा कर। (1 तीमुथियुस 6:11) आपके जीवन में कुछ भी आकस्मिक नहीं है। कुछ भी संयोग नहीं है। आपका जीवन कोई दुर्घटना नहीं—यह एक जिम्मेदारी है जिसे परमेश्वर ने आपके हाथों में सौंपा है। बहुत से […]
दृढ़ता से कमजोरी को ‘ना’ कहें

जो बलहीन हो वह भी कहे, मैं बलवन्त हूं(योएल 3:10)। मसीह में, कमजोरी न तो आपकी पहचान है, न आपकी भाषा, और न ही आपकी तक़दीर। परमेश्वर ने आपको सीमाओं से नहीं, सामर्थ से जीवन जीने के लिए सामर्थी किया है। वचन निर्बल को यह कहने के लिए कहता है कि “मैं बलवन्त हूँ,” जिससे […]
अपने भीतरी मनुष्य से जीवन जिए

कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें यह दान दे, कि तुम उसके आत्मा से अपने भीतरी मनुष्यत्व में सामर्थ पाकर बलवन्त होते जाओ (इफिसियों 3:16)। परमेश्वर ने कभी भी यह नहीं चाहा कि आप अपना जीवन मुख्य रूप से बाहरी परिस्थितियों, भावनाओं या शारीरिक इंद्रियों के अनुसार जिए। आप एक आत्मा है, […]
सत्यनिष्ठा का उपहार

जो पाप से अज्ञात था, उसी को उस ने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में होकर परमेश्वर की सत्यनिष्ठ बन जाएं। (2 कुरिंथियों 5:21) सत्यनिष्ठा कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे हम अपने प्रयास, अनुशासन या नैतिक पूर्णता के द्वारा कमाते हैं; यह मसीह में हमें दिया गया परमेश्वर का दिव्य उपहार है। […]
प्रभु यीशु हमें संगती में ले आए

चोर केवल चोरी करने, घात करने और नाश करने के लिये आता है; मैं इसलिये आया कि वे जीवन पाएं, और बहुतायत से पाएं।(यूहन्ना 10:10) क्रिसमस का महान महत्व केवल मसीह के जन्म के चमत्कार में नहीं है, बल्कि उस उद्देश्य में है जिसके लिये उसका जन्म हुआ। स्वयं यीशु ने कहा कि वे हमें […]
प्रभु यीशु: हमारे जीवन की परिपूर्णता

क्योंकि उस की परिपूर्णता से हम सब ने प्राप्त किया अर्थात अनुग्रह पर अनुग्रह। (यूहन्ना 1:16) मसीहत शिक्षाओं का संग्रह या मौसमी प्रतिबिंब नहीं है — यह एक प्राप्त किया गया जीवन है। यीशु केवल मानवता में सुधार करने नहीं आया; वह खुद को देने आया। जिस क्षण हमने विश्वास किया, उसकी परिपूर्णता हमारी विरासत […]
मसीह मुझ में: परमेश्वर की उपस्थिति का वास

पिता जो मुझमें रहता है, वही काम करता है। (यूहन्ना 14:10) क्रिसमस एक महान सत्य की घोषणा करता है — परमेश्वर मनुष्य बना ताकि परमेश्वर मनुष्यों के अंदर रह सके। यीशु को पवित्र आत्मा की संतान कहा गया क्योंकि पवित्र आत्मा मरियम के ऊपर आया था। और आज, हर नया जन्म ग्रहण करके बना विश्वासी, […]
परमेश्वर के राज्य की हक़ीक़त में चलना

तेरा राज्य आए; तेरी इच्छा जैसी स्वर्ग में पूरी होती है, वैसे पृथ्वी पर भी हो। (मत्ती 6:10) परमेश्वर का राज्य एक विचार नहीं है – यह एक हक़ीक़त है। यह दिव्य सिद्धांतों के अनुसार कार्य करता है, राजा यीशु के अधिकार के अधीन में। जब आप चेतना के साथ इस राज्य में रहते हैं, […]