क्या आप परमेश्वर के राज्य में एक अहम व्यक्ति हैं?

सो इसलिये कि तू गुनगुना है, और न ठंडा है और न गर्म, मैं तुझे अपने मुंह में से उगलने पर हूं। (प्रकाशित वाक्य 3:16) मसीहत कोई धर्म नही है, यह परमेश्वर का जीवन है जो एक मनुष्य में हैं। यह परमेश्वर है जो अपना जीवन आप में और आपके द्वारा जी रहा है। चाहे […]

निस्वार्थ भाव से दें

क्योंकि जहां तेरा धन है, वहीं तेरा मन भी रहेगा। (मत्ती 6:21) परमेश्वर ने हमें अपने स्वरूप में बनाया है और वह हमसे अत्यन्त प्रेम करता है। उसने हमें अपनी समानता में इसलिए बनाया है ताकि हम उसकी सृष्टि के मुकुट बनें, जिन्हें उसे जानने और उसके साथ संगति करने का सौभाग्य प्राप्त है। यीशु […]