अपने जीवन में वचन को सिद्ध करें

और यदि तुम मसीह के हो, तो इब्राहीम के वंश और प्रतिज्ञा के अनुसार वारिस भी हो। (गलातियों 3:29) एक विश्वासी के रूप में आप परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं से अलग नहीं हैं—आप पूरी तरह मसीह में स्थित हैं। इसका अर्थ है कि अब्राहम से जुड़ी आशीषें अब आपकी हैं। आप परमेश्वर की वाचा का हिस्सा […]
ऐसे ही समय के लिए

फिर क्या जाने तुझे ऐसे ही कठिन समय के लिये राजपद मिल गया हो? (एस्तेर 4:14) आपके जीवन का हर मौसम एक ज़िम्मेदारी लेकर आता है। एस्तेर महल में संयोग से नहीं रखी गई थी—परमेश्वर ने उसे सही समय पर एक उद्देश्य के लिए स्थापित किया था। उसी तरह, आज आप जहाँ हैं, वह भी […]
दृढ़ता से असफलता को ‘ना’ कहें

परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो मसीह में सदा हम को जय के उत्सव में लिये फिरता है (2 कुरिन्थियों 2:14)। मसीह में असफलता आपका भाग नहीं है, और न ही इसे कभी आपके परिणाम के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। मसीह यीशु में आपका जीवन विजय, उन्नति और फलवंतता के लिए रचा गया […]
यीशु: निरंतर-बढ़ते अनुग्रह का लेखक

क्योंकि उस की परिपूर्णता से हम सब ने प्राप्त किया अर्थात अनुग्रह पर अनुग्रह। (यूहन्ना 1:16) यीशु के जन्म ने अनुग्रह की शुरुआत को चिह्नित किया – जीवन में केवल एक बार नहीं, बल्कि अनुग्रह पर अनुग्रह, लगातार बढ़ता हुआ। अनुग्रह सिर्फ़ बिना वजह का पक्ष नहीं है; यह दिव्य क्षमता, अलौकिक सहायता और सफल […]
वही मत रुकें!

और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए। (रोमियों 12:2) विश्वास एक आत्मिक मसल(muscle)है, और सभी मसल(muscle) की तरह, यह तभी बढ़ती है जब इसका इस्तेमाल किया जाता है। क्षमता तब बढ़ती है जब आप ख़ुद को उस स्तर से आगे खिंचते हैं […]
आपके विश्वास के कार्य आपकी ऊंचाई तय करते हैं

कर्मों के बिना विश्वास मरा हुआ है। (याकूब 2:26) आपके कार्य बताते हैं कि आप स्वर्ग के साथ चलते हैं या दुनिया के सिस्टम के साथ खड़े रहते हैं। आपका हर कदम या तो परमेश्वर के राज्य और उसके स्वर्गदूतों के साथ आपकी सहभागिता को मज़बूत करता है, या फिर अंधकार की शक्तियों को आपके […]
सही अंगीकार की सामर्थ

क्योंकि सत्यनिष्ठा के लिये मन से विश्वास किया जाता है, और उद्धार के लिये मुंह से अंगीकार किया जाता है। (रोमियों 10:10) आपका जीवन आपके घोषणा के स्तर पर ऊपर या नीचे जाता है। बहुत से विश्वासी परमेश्वर के साथ चलने में संघर्ष करते हैं, इसलिए नहीं कि उन में विश्वास की कमी है, बल्कि […]
हर चुनौती: एक अवसर!

जितने हथियार तेरी हानि के लिये बनाए जाएं, उन में से कोई सफल न होगा… (यशायाह 54:17) कोई भी चीज़ अचानक आपके खिलाफ नहीं आती। हर स्थिति, हर दबाव, हर चुनौती परमेश्वर के लिए आप में अपनी महिमा प्रकट करने का एक अवसर होता है। वचन हमें सिखाता है कि दुख हल्के और कुछ समय […]
प्रभु में अपनी सामर्थ को नवीनीकृत करें!

परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे। (यशायाह 40:31) प्रभु की प्रतीक्षा करना निष्क्रिय नहीं है; यह विश्वास, आराधना और भरोसे की एक सक्रिय अवस्था है। उसकी प्रतीक्षा करना निष्क्रियता नहीं है — […]
आत्मा से जीना: फलवंत स्थिरता का जीवन

यदि हम आत्मा के द्वारा जीवित हैं, तो आत्मा के अनुसार चलें भी। (गलातियों 5:25) पिछले दिनों में हमने यह जाना कि सच्ची सफलता और फलवंतता आत्मा से प्रवाहित होती है। परमेश्वर ने आपके भीतर सृजन करने, समृद्ध होने और दिव्य उत्कृष्टता में जीवन जीने की सामर्थ रखी है। अपनी आत्मिक क्षमताओं की खोज करने […]