खुद पर विश्वास के संदेशों की बौछार करें

सो विश्वास सुनने से, और सुनना मसीह के वचन से होता है (रोमियों 10:17)। विश्वास आकस्मिक रूप से नहीं बढ़ता; इसे जानबूझकर बढ़ाया जाता है।क्योंकि विश्वास सुनने से आता है, तो मजबूत विश्वास बनाए रखने के लिए परमेश्वर के वचन के निरंतर संपर्क में रहना आवश्यक है। विश्वास के संदेश से खुद को भरने का […]
अपने मन को नवीनीकृत करने की ज़िम्मेदारी

और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए… (रोमियों 12:2) नया साल अपने आप नए परिणाम नहीं लाता। कई लोग नए साल में उत्साह और अपेक्षा के साथ प्रवेश करते हैं, लेकिन पुराने पैटर्न दोहराते हुए साल के अंत में निराश हो जाते […]
स्वर्ग के कार्य करने का तरीका

मैं यह कहता हूं, कि वारिस जब तक बालक है, यद्यपि सब वस्तुओं का स्वामी है, तौभी उस में और दास में कुछ भेद नहीं। परन्तु पिता के ठहराए हुए समय तक रक्षकोंऔर भण्डारियों के वश में रहता है। वैसे ही हम भी, जब बालक थे, तो संसार की आदि शिक्षा के वश में होकर […]
मसीह में सीमाओं से परे जीवन

सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। (2 कुरिंथियों 5:17) मसीह में होना जीवन के एक बिल्कुल नए क्षेत्र में प्रवेश करना है। उद्धार ने आपके पुराने जीवन को केवल बेहतर नहीं बनाया; उसने आपको एक बिल्कुल नया जीवन दिया—परमेश्वर […]
एक आभारी हृदय

हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह; और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे! हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना। वही तो तेरे सब अधर्म को क्षमा करता हैं, और तेरे सब रोगों को चंगा करता है, वही तो तेरे प्राण […]
यीशु: वह ज्योति जो हमारे मार्ग का मार्गदर्शन करता है

जगत की ज्योति मैं हूं; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा। (यूहन्ना 8:12) क्रिसमस रोशनी का त्योहार है — लेकिन जो रोशनी हम पेड़ों या सड़कों पर सजाते हैं, उससे कहीं महान वह ज्योति है जो स्वर्ग से आई। यीशु सिर्फ़ अन्धकार को दूर करने नहीं […]
यीशु: आत्मिक बढ़ोतरी और परिपक्वता का चरवाहा

आओ हम सिद्धता की ओर बढ़ें; दोबारा नींव न रखें… (इब्रानियों 6:1) क्रिसमस पृथ्वी पर यीशु की कहानी की शुरुआत का प्रतीक है – लेकिन यह हर विश्वासी की आत्मिक परिपक्वता की यात्रा की शुरुआत का भी प्रतीक है। परमेश्वर ने हमें आत्मिक शिशु बने रहने के लिए नहीं बुलाया। परमेश्वर की इच्छा है कि […]
वही मत रुकें!

और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए। (रोमियों 12:2) विश्वास एक आत्मिक मसल(muscle)है, और सभी मसल(muscle) की तरह, यह तभी बढ़ती है जब इसका इस्तेमाल किया जाता है। क्षमता तब बढ़ती है जब आप ख़ुद को उस स्तर से आगे खिंचते हैं […]
सही अंगीकार की सामर्थ

क्योंकि सत्यनिष्ठा के लिये मन से विश्वास किया जाता है, और उद्धार के लिये मुंह से अंगीकार किया जाता है। (रोमियों 10:10) आपका जीवन आपके घोषणा के स्तर पर ऊपर या नीचे जाता है। बहुत से विश्वासी परमेश्वर के साथ चलने में संघर्ष करते हैं, इसलिए नहीं कि उन में विश्वास की कमी है, बल्कि […]
आत्मिक क्षमता में बढ़ोतरी

परन्तु हम परमेश्वर का वह गुप्त ज्ञान, भेद की रीति पर बताते हैं, जिसे परमेश्वर ने सनातन से हमारी महिमा के लिये ठहराया। (1 कुरिन्थियों 2:7) हर विश्वासी के पास एक आत्मिक क्षमता होती है जो यह निर्धारित करती है कि वह कितना प्रकटीकरण और सामर्थ ग्रहण कर सकता है। जितना अधिक आप अपनी क्षमता […]