वही मत रुकें!

और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए। (रोमियों 12:2) विश्वास एक आत्मिक मसल(muscle)है, और सभी मसल(muscle) की तरह, यह तभी बढ़ती है जब इसका इस्तेमाल किया जाता है। क्षमता तब बढ़ती है जब आप ख़ुद को उस स्तर से आगे खिंचते हैं […]