पवित्र आत्मा के प्रवाह में बढ़ते जाइए

और ऐसा होगा कि जहाँ-जहाँ ये नदियाँ जाएँगी, वहाँ हर एक जीवित प्राणी जो चलता-फिरता है, जीवित रहेगा… ( यहेजकेल 47:9) पवित्र आत्मा आपके साथ कभी-कभार होने वाले अनुभव से कहीं अधिक चाहता है; वह चाहता है कि आपके जीवन में उसका लगातार प्रवाह बना रहे। यहेजकेल के दर्शन में पानी पहले टखनों तक पहुँचा, […]
प्रभु में अपने आप को मजबूत करें

दाऊद ने अपने परमेश्वर यहोवा में अपने आप को मजबूत किया। (1 शमूएल 30:6) जीवन में ऐसे समय आते हैं जब परिस्थितियाँ बहुत भारी लगती हैं। सिकलग में दाऊद के जीवन में भी ऐसा ही समय आया। उसका नगर नष्ट हो गया था, उसका परिवार बंदी बना लिया गया था और यहाँ तक कि उसके […]
पवित्र आत्मा आपको नया उत्साह देता है

मैं आत्मा से प्रार्थना करूँगा और समझ से भी प्रार्थना करूँगा… (1 कुरिन्थियों 14:15) आपके जीवन में पवित्र आत्मा की अद्भुत सेवकाइयों में से एक है आपको नया उत्साह देना, मजबूत करना और भीतर से सामर्थ देना। आपने चाहे जो कुछ भी सामना किया हो या आपके आसपास चाहे कितना भी दबाव हो, पवित्र आत्मा […]
बहाने बनाना बंद कीजिए

जो मुझे सामर्थ देता है, उसमें मैं सब कुछ कर सकता हूँ। (फिलिप्पियों 4:13) आत्मिक विकास में सबसे बड़ी रुकावटों में से एक बहाने बनाने की आदत है। कुछ लोग अपने परिवार, काम की जगह, परिस्थितियों या यहाँ तक कि अपनी सरकार को दोष देते हैं कि वे वह काम नहीं कर पा रहे हैं […]
आत्मा में खुद को मजबूत बनाएँ

जो स्वर्गीय भाषा में बातें करता है, वह अपनी ही उन्नति करता है… (1 कुरिन्थियों 14:4) परमेश्वर ने हर विश्वासी को जो सबसे महान वरदान दिए हैं, उनमें से एक है आत्मिक रूप से खुद को मज़बूत बनाने की सामर्थ। बाइबल बताती है कि जब हम स्वर्गीय भाषा में प्रार्थना करते हैं, तब हम अपनी […]
प्रतिदिन पवित्र आत्मा में चलें

इसलिये कि जितने लोग परमेश्वर के आत्मा के चलाए चलते हैं, वे ही परमेश्वर के पुत्र हैं। (रोमियों 8:14) बहुत से लोग सोचते हैं कि आत्मिक बढ़ोतरी समय के साथ अपने-आप हो जाती है, लेकिन यह सच नहीं है। आत्मिक परिपक्वता परमेश्वर के साथ लगातार चलने से आती है। कोई व्यक्ति कई वर्षों से चर्च […]
निरंतर आत्मा से भरते रहे

और दाखरस से मतवाले न बनो… परन्तु आत्मा से भरते जाओ। (इफिसियों 5:18) परमेश्वर ने कभी नहीं चाहा कि मसीही जीवन कभी-कभी या आधे मन से जिया जाए। उसकी इच्छा है कि आप निरंतर पवित्र आत्मा से भरे रहें। जैसे इस संसार के प्रभाव किसी व्यक्ति के विचारों और व्यवहार को प्रभावित करते हैं, उसी […]
नवीकृत सामर्थ

परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे…” (यशायाह 40:31) नवीकरण का अर्थ है पुनर्जीवित — यानि फिर से जीवित होना। परमेश्वर ने कभी नहीं चाहा कि आप कमज़ोर, खाली या थके हुए रहें। जब आप प्रभु की बाट जोहते हैं, तब एक दिव्य एक्सचेंज […]
दिव्य आत्मविश्वास में चलें

क्योंकि परमेश्वर ने हमें भय की नहीं पर सामर्थ, और प्रेम, और संयम की आत्मा दी है। (2 तीमुथियुस 1:7) परमेश्वर की संतान होने के नाते, आपको अपने आस-पास की दुनिया से कभी भी डरकर नहीं जीना चाहिए। आपके भीतर पवित्र आत्मा की उपस्थिति कोई ऐसी बात नहीं है जिसे छिपाया जाए या जिसके कारण […]
परमेश्वर की सामर्थ के प्रवाह का हर दिन अभ्यास करें

क्योंकि परमेश्वर का राज्य बातों में नहीं, परन्तु सामर्थ में है (1 कुरिंथियों 4:20)। परमेश्वर ने कभी यह नहीं चाहा कि उसकी संताने केवल ज्ञान में बिना किसी प्रदर्शन के जिएं। राज्य केवल शब्दों के द्वारा ही नहीं, बल्कि सामर्थ के द्वारा प्रकट होता है। इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि आप परमेश्वर की सामर्थ […]