यीशु: आत्मिक बढ़ोतरी और परिपक्वता का चरवाहा

आओ हम सिद्धता की ओर बढ़ें; दोबारा नींव न रखें… (इब्रानियों 6:1) क्रिसमस पृथ्वी पर यीशु की कहानी की शुरुआत का प्रतीक है – लेकिन यह हर विश्वासी की आत्मिक परिपक्वता की यात्रा की शुरुआत का भी प्रतीक है। परमेश्वर ने हमें आत्मिक शिशु बने रहने के लिए नहीं बुलाया। परमेश्वर की इच्छा है कि […]
यीशु से शर्मिंदा मत होइए

क्योंकि मैं सुसमाचार से नहीं लजाता, इसलिये कि वह हर एक विश्वास करने वाले के लिये, पहिले तो यहूदी, फिर यूनानी के लिये उद्धार के निमित परमेश्वर की सामर्थ है। (रोमियों 1:16) यह बहुत ज़रूरी है की हम अपने प्रभु यीशु मसीह के साथ अपनी पहचान पर गर्व करें। परमेश्वर की संतान होने के नाते, […]