अपने दिव्य कार्य पर केंद्रित रहना

तेरी आंखें साम्हने ही की ओर लगी रहें, और तेरी पलकें आगे की ओर खुली रहें (नीतिवचन 4:25)। परमेश्वर की हर संतान के पास एक दिव्य कार्य है – एक विशिष्ट उद्देश्य और योगदान जो संसार की नींव रखने से पहले पिता द्वारा तैयार किया गया था। महिमा बहुत सारे काम करने में नहीं है, […]
धन्यवाद से भरा जीवन जिएं

हर बात में धन्यवाद करो… (1 थिस्सलुनीकियों 5:18) धन्यवाद देना शायद साधारण लगे, लेकिन इसमें बड़ी सामर्थ है। यह केवल “धन्यवाद” कहने तक सीमित नहीं है—यह इस बात को पहचानना है कि परमेश्वर ने क्या किया है और उसके प्रति सही रवैये के साथ प्रतिक्रिया देना है। जब आप याद करते हैं कि परमेश्वर आपको […]
परमेश्वर आपका स्रोत है

और मेरा परमेश्वर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा।(फिलिप्पियों 4:19) सबसे महत्वपूर्ण सच्चाइयों में से एक जिसे आपको अपने हृदय में स्थिर कर लेना है, यह है: परमेश्वर आपका स्रोत है। लोग नहीं, सिस्टम नहीं, परिस्थितियाँ नहीं—केवल परमेश्वर। आपकी हर आवश्यकता […]
उसके लिए अलग किए गए

पर तुम एक चुना हुआ वंश…याजकों का समाज… (1 पतरस 2:9) वास्तव में “अलग किए जाने” का क्या अर्थ है? इसका अर्थ है कि आप एक विशेष रूप से परमेश्वर के लिए छाटे गए हैं। आप पवित्र है। पवित्रता केवल बाहरी कार्यों के बारे में नहीं है—यह आपकी पहचान से शुरू होती है। आप अलग […]
निर्माण और उन्नति के लिए भविष्यवाणी करें

प्रेम का अनुसरण करो और आत्मिक वरदानों की भी धुन में रहो विशेष करके यह, कि भविष्यद्वाणी करो। (1 कुरिन्थियों 14:1) परमेश्वर भविष्यवाणी को बहुत महत्व देता है क्योंकि यह निर्माण करता है और मजबूत बनाता है। जहाँ स्वर्गीय भाषा में प्रार्थना करना आपकी आत्मा को उन्नति देता है, वहीं भविष्यवाणी उससे भी आगे बढ़कर […]
अपने शब्दों को व्यर्थ न बनाये
मूर्खतापूर्ण, अज्ञानतापूर्ण विवादों में न पड़ो; क्योंकि तुम जानते हो कि वे झगड़े उत्पन्न करते हैं। (2 तीमुथियुस 2:23) हम कैसे बोलते हैं और क्या बोलते हैं, यह हमारे जीवन की दिशा को निर्धारित करता है। इसलिए, हमें कभी भी बेकार और निरर्थक बहस और चर्चा में लिप्त होकर अपने शब्दों को बर्बाद नहीं करना […]