दृढ़ता से कमी को ‘ना’ कहें

यहोवा मेरा चरवाहा है; मुझे किसी वस्तु की घटी न होगी। (भजन संहिता 23:1) मसीह में कमी आपके जीवन का भाग नहीं है, और इसे कभी भी सामान्य मानकर स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। परमेश्वर ने आपको मसीह में स्थापित करके पहले ही प्रचुरता में स्थापित कर दिया है, जहाँ से हर प्रावधान स्वतंत्र रूप […]
दृढ़ता से कमजोरी को ‘ना’ कहें

जो बलहीन हो वह भी कहे, मैं बलवन्त हूं(योएल 3:10)। मसीह में, कमजोरी न तो आपकी पहचान है, न आपकी भाषा, और न ही आपकी तक़दीर। परमेश्वर ने आपको सीमाओं से नहीं, सामर्थ से जीवन जीने के लिए सामर्थी किया है। वचन निर्बल को यह कहने के लिए कहता है कि “मैं बलवन्त हूँ,” जिससे […]
विजय के लिए अपनी आत्मा को प्रशिक्षित करे

पर अन्न सयानों के लिये है, जिन के ज्ञानेन्द्रिय अभ्यास करते करते, भले बुरे में भेद करने के लिये पक्के हो गए हैं (इब्रानियों 5:14)। जिस प्रकार एक खिलाड़ी ट्रॉफी जीतने के लिए अपने शरीर को प्रशिक्षित करता है, उसी प्रकार निरंतर विजय में जीने के लिए आपकी आत्मा को भी प्रशिक्षण की आवश्यकता होती […]
अपने भीतरी मनुष्य से जीवन जिए

कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें यह दान दे, कि तुम उसके आत्मा से अपने भीतरी मनुष्यत्व में सामर्थ पाकर बलवन्त होते जाओ (इफिसियों 3:16)। परमेश्वर ने कभी भी यह नहीं चाहा कि आप अपना जीवन मुख्य रूप से बाहरी परिस्थितियों, भावनाओं या शारीरिक इंद्रियों के अनुसार जिए। आप एक आत्मा है, […]
खुद पर विश्वास के संदेशों की बौछार करें

सो विश्वास सुनने से, और सुनना मसीह के वचन से होता है (रोमियों 10:17)। विश्वास आकस्मिक रूप से नहीं बढ़ता; इसे जानबूझकर बढ़ाया जाता है।क्योंकि विश्वास सुनने से आता है, तो मजबूत विश्वास बनाए रखने के लिए परमेश्वर के वचन के निरंतर संपर्क में रहना आवश्यक है। विश्वास के संदेश से खुद को भरने का […]
पीछे मत हटे

और मेरा सत्यनिष्ठ जन विश्वास से जीवित रहेगा, और यदि वह पीछे हट जाए तो मेरा मन उस से प्रसन्न न होगा। (इब्रानियों 10:38) बहुत से ऐसे लोग होते हैं जो परमेश्वर के साथ अपनी यात्रा, बहुत उत्साह के साथ शुरू करते हैं परन्तु उसी उत्साह के साथ इसे जारी नही रखते। जब वे नया […]
विश्वास की अच्छी लड़ाई अंत तक लड़े

विश्वास की अच्छी कुश्ती लड़; और उस अनन्त जीवन को धर ले, जिस के लिये तू बुलाया गया (1 तीमुथियुस 6:12) मसीही जीवन निष्क्रिय नहीं है; यह विश्वास का जीवन है, जिसे सचेत रूप से प्रयोग करना और बनाए रखना होता है। पवित्रशास्त्र इसे अच्छी लड़ाई कहता है, क्योंकि मसीह में विजय पहले ही सुनिश्चित […]
हर परिस्थिति में परमेश्वर का वचन बोलें

जीभ के वश में मृत्यु और जीवन दोनों होते हैं, और जो उसे काम में लाना जानता है वह उसका फल भोगेगा (नीतिवचन 18:21)। मसीह में, आपके शब्द साधारण नहीं होते—वे आत्मिक अधिकार से भरे होते हैं। परमेश्वर ने आपको अपना वचन इसलिए दिया है ताकि आप जिस परिस्थिति का सामना करें, उसमें उसकी वास्तविकता […]
हालातों को देखकर विचलित न हों

क्योंकि हम रूप को देखकर नहीं, पर विश्वास से चलते हैं (2 कुरिंथियों 5:7)। मसीह में परमेश्वर की संतान होने के नाते आप , आपको जो दिखाई देता है उसके अनुसार जीने के लिए नहीं, बल्कि जो परमेश्वर पहले ही बोल चुका है उसके अनुसार जीने के लिए बुलाये गये है। हालात भले ही मुश्किल, […]
चिंता करने से इनकार करें

किसी भी बात की चिन्ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं (फिलिप्पियों 4:6)। चिंता विश्वास से ध्यान हटाने का एक साधन है और शत्रु की एक सूक्ष्म चाल है, जिसका उद्देश्य परमेश्वर की पर्याप्तता से आपका ध्यान भटकाना […]