हियाब: प्रभुत्व और अधिकार की आवाज़

और मेरे लिये भी, कि मुझे बोलने के समय ऐसा प्रबल वचन दिया जाए, कि मैं हियाब से सुसमाचार का भेद बता सकूं। (इफिसियों 6:19) हियाब अधिकार से जुड़ा हुआ है। सुसमाचार प्रचार करने के लिए जिस हियाब की आवश्यकता है, वही हियाब परिस्थितियों को आज्ञा देने के लिए भी आवश्यक है। यदि आप खुले […]
शांति को सुरक्षित रखने वाला हियाब

मैं तुम्हें शान्ति दिए जाता हूँ; अपनी शान्ति तुम्हें देता हूँ। जैसा संसार देता है, मैं तुम्हें वैसी शान्ति नहीं देता। तुम्हारा मन न घबराए, और न डरे।(यूहन्ना 14:27) शांति का मतलब न तो चुप्पी है और न ही चीज़ों का थम जाना। शांति का अर्थ है संपूर्णता—ऐसी अवस्था जहाँ कुछ भी टूटा हुआ या […]
सत्यनिष्ठा में निहित हियाब

इसलिये आओ, हम अनुग्रह के सिंहासन के निकट हियाब बान्धकर चलें, कि हम पर दया हो, और वह अनुग्रह पाएं, जो आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे। (इब्रानियों 4:16) पवित्रशास्त्र में जिस हियाब की बात की गई है, वह कोई व्यक्तित्व का गुण या स्वाभाविक आत्मविश्वास नहीं है। यह कोई सीखा हुआ व्यवहार या बाहरी […]
परमेश्वर ने आपको चुना है: मत डरो

मत डर, हे छोटे झुण्ड; क्योंकि तुम्हारे पिता को यह भाया है, कि तुम्हें राज्य दे (लूका 12:32)। परमेश्वर के पास अपनी हर संतान के लिए एक सुंदर सपना है। यह वर्स न केवल परमेश्वर के इरादे को, बल्कि उसके हृदय को भी प्रकट करता है। वह राज्य को किसी झिझक या किसी शर्त पर […]
परमेश्वर ने आपको चुना है: स्थापित करें

और उस ने उन से कहा, तुम सारे जगत में जाकर सारी सृष्टि के लोगों को सुसमाचार प्रचार करो (मरकुस 16:15)। यीशु द्वारा दिए गए इस निर्देश में कुछ बहुत महत्वपूर्ण है। ध्यान दें कि उसने यह नहीं कहा, “हर व्यक्ति को” या “हर मनुष्य को सुसमाचार सुनाओ,” बल्कि कहा, “हर प्राणी को”। यह उस […]
परमेश्वर ने आपको चुना

परन्तु तू अपने परमेश्वर यहोवा को स्मरण रखना, क्योंकि वही है जो तुझे सम्पति प्राप्त करने का सामर्थ्य इसलिये देता है, कि जो वाचा उसने तेरे पूर्वजों से शपथ खाकर बान्धी थी उसको पूरा करे, जैसा आज प्रगट है(व्यवस्थाविवरण 8:18)। अब जब आप मसीह में हैं, तो इस बात को अच्छी तरह समझ लें—की परमेश्वर […]
असीमित संसाधन

और परमेश्वर सब प्रकार का अनुग्रह तुम्हें बहुतायत से दे सकता है जिस से हर बात में और हर समय, सब कुछ, जो तुम्हें आवश्यक हो, तुम्हारे पास रहे, और हर एक भले काम के लिये तुम्हारे पास बहुत कुछ हो(2 कुरिंथियों 9:8)। मसीह यीशु में आप कमी के स्तर से नहीं, बल्कि प्रचुरता और […]
উদ্যমই যথেষ্ট নয়

“ঈশ্বরের প্রতি তাহাদের অনুরাগ আছে, কিন্তু তাহা জ্ঞানানুযায়ী নয়।” (Romans 10:2) জ্ঞানহীন আবেগ ধ্বংসের দিকে নিয়ে যায়। অনেকে আন্তরিকভাবে ঈশ্বরের সেবা করতে চায় কিন্তু তারা অস্থিরতার মধ্যে চলে, কারণ তাদের উদ্দীপনা সত্যের ওপর প্রতিষ্ঠিত নয়। আমাদের কাছে যা যুক্তিযুক্ত মনে হয়, সবসময় তা ঈশ্বর যা বলছেন তা নয়। আবার পৃথিবীতে ঈশ্বরের সিদ্ধ ইচ্ছা প্রতিষ্ঠার জন্য […]
सिर्फ़ जोश ही काफी नहीं है

कि उन को परमेश्वर के लिये धुन रहती है, परन्तु बुद्धिमानी(ज्ञान) के साथ नहीं। (रोमियों 10:2) ज्ञान के बिना जुनून विनाश की ओर ले जाता है। बहुत से लोग सच्चे मन से परमेश्वर की सेवा करना चाहते हैं, लेकिन अस्थिरता में चलते हैं, क्योंकि उनका जोश सत्य पर आधारित नहीं होता। जो बात लॉजिकल लगती […]
प्रेम में चलना ही सत्य में चलना है

क्योंकि जो दूसरे से प्रेम रखता है, उसी ने व्यवस्था पूरी की है। (रोमियों 13:8) प्रेम के बिना सत्य कठोर धर्म बन जाता है। प्रेम के बिना मसीहियत केवल एक और मनुष्य-निर्मित धर्म बनकर रह जाता है—जो परमेश्वर के हृदय को नज़रअंदाज़ करते हुए शरीर को संतुष्ट करने के लिए बनाया गया है। प्रभु यीशु […]