आत्मा से, न कि दृष्टि से!

क्योंकि शरीर के अनुसार चलने वाले शरीर की बातें पर मन लगाते हैं; परन्तु आत्मिक मनुष्य आत्मा की बातें पर मन लगाते हैं। (रोमियों 8:5) जीवन आत्मिक है। जो लोग आत्मा के द्वारा जीते हैं वे चिंता, डर और ज्यादा सोचने से ख़ुद को ऊपर उठा लेते हैं। सांसारिक मन हमेशा यह जानने की कोशिश […]
सही मायने में देने से उत्पन्न होने वाली सामर्थ

परन्तु बात तो यह है, कि जो थोड़ा बोता है वह थोड़ा काटेगा भी; और जो बहुत बोता है, वह बहुत काटेगा। (2 कुरिन्थियों 9:6) देना कोई आर्थिक कार्य नहीं है – यह एक आत्मिक कार्य है। असली देना प्रकटीकरण से उत्पन्न होता है, न कि रूटीन से। जब आप कुछ ऐसा बोते हैं जिसमें […]
गलत क्लबों से बाहर निकलें

धोखा न खाना, बुरी संगति अच्छे चरित्र को बिगाड़ देती है। (1 कुरिन्थियों 15:33) लोग अनजाने में कुछ अदृश्य ‘क्लबों’ में शामिल हो जाते हैं—कंजूसों का क्लब, शिकायतकर्ताओं का क्लब, डरपोकों का क्लब, या संदेह करने वालों का क्लब। इनमें से हर एक मानसिक और आत्मिक क्लब लोगों को सीमाओं में फंसा देते है। कुछ […]
परमेश्वर के अनुग्रह का मूल्य समझें!

और हम जो उसके सहकर्मी हैं यह भी समझाते हैं, कि परमेश्वर का अनुग्रह जो तुम पर हुआ, व्यर्थ न रहने दो। (2 कुरिन्थियों 6:1) अनुग्रह परमेश्वर का आपके प्रति अकारण पक्ष है। अनुग्रह परमेश्वर की अलौकिक क्षमता है जो आप में और आपके माध्यम से कार्य करती है। लेकिन अनुग्रह को कभी भी हल्के […]
प्रभु आपका चरवाहा है

यहोवा मेरा चरवाहा है, मुझे कुछ घटी न होगी। (भजन संहिता 23:1) भजनकार की यह कितनी प्रभावशाली घोषणा है—“मुझे कुछ घटी न होगी।” जब प्रभु आपका चरवाहा है, तो आपको कभी कमी नहीं हो सकती। एक चरवाहा अपनी भेड़ों की आवश्यकताओं को पूरा करता है, उनकी रक्षा करता है, और उन्हें बहुतायत की ओर ले […]
एक नवीनीकृत मन की सामर्थ

और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए। (रोमियों 12:2) परिवर्तन एक बार होने वाली घटना नहीं है; यह आपके मन को परमेश्वर के वचन से नवीनीकृत करने की एक निरंतर प्रक्रिया है। परिवर्तन मन से शुरू होता है। उद्धार के बाद भी, […]
भावनाओं से ऊपर विश्वास

क्योंकि हम रूप को देखकर नहीं, पर विश्वास से चलते हैं। (2 कुरिन्थियों 5:7) विश्वास आत्मा की भाषा है, जबकि भावनाएँ शरीर से संबंध रखती हैं। विश्वास उस पर आधारित नहीं है जो आप देखते हैं या महसूस करते हैं, बल्कि उस पर आधारित है जो परमेश्वर ने कहा है। भावनाएँ बदलती रहती हैं, परन्तु […]
अपने हृदय की रक्षा करें

सब से अधिक अपने मन की रक्षा कर; क्योंकि जीवन का मूल स्रोत वही है। (नीतिवचन 4:23) आपका हृदय – आपका आंतरिक मनुष्य – आपके जीवन में प्रवाहित होने वाली हर चीज़ का स्रोत है। आपके हृदय में जो कुछ भी भरा है, वही आपकी दिशा निर्धारित करता है। आप जो कुछ भी सोचते, कहते […]
प्रभु में अपनी सामर्थ को नवीनीकृत करें!

परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे। (यशायाह 40:31) प्रभु की प्रतीक्षा करना निष्क्रिय नहीं है; यह विश्वास, आराधना और भरोसे की एक सक्रिय अवस्था है। उसकी प्रतीक्षा करना निष्क्रियता नहीं है — […]
आप परमेश्वर के मास्टरपीस है

क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया। (इफिसियों 2:10) आप साधारण नहीं हैं। आप परमेश्वर की खुद की रचना हैं, जिसे आपके जन्म से बहुत पहले से ही अस्तित्व में रहे एक उद्देश्य के […]