आपको छुटकारे की ज़रूरत नही है

और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिस ने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में समभागी हों। उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया। (कुलुस्सियों 1:12-13) अगर आप नए जन्में हैं, तो आपको शैतान की शक्ति से पहले ही छुटकारा […]

डुनामिस की ओर प्रबुद्ध किया जाना

परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे (प्रेरितों के काम 1:8)। सामर्थ शब्द का शाब्दिक अर्थ है नियंत्रणकारी प्रभाव, श्रेष्ठता या अधिकार का होना। हालाँकि, हमारे मुख्य वर्स में ‘सामर्थ’ शब्द का गहरा अर्थ है, […]

दिव्य चेतना

मेरे ज्ञान के न होने से मेरी प्रजा नाश हो गई… (होशे 4:6आ) क्या आपने हमारे मुख्य वर्स में कुछ नोटिस किया? परमेश्वर यह नहीं कह रहा है कि पापियों का नाश हो गया है, बल्कि वह अपने पवित्र लोगों की बात कर रहा है। यदि वह पवित्र लोगों की बात नहीं कर रहा होता, […]

दिव्य जीवन

जिस के पास पुत्र है, उसके पास जीवन है; और जिस के पास परमेश्वर का पुत्र नहीं, उसके पास जीवन भी नहीं है। (1 यूहन्ना 5:12) मसीह में, हमें दिव्य जीवन प्राप्त हुआ है। इस जीवन के लिए ग्रीक शब्द “ज़ोए” है, इस शब्द का अनुवाद करते समय, इसके कई अलग-अलग अर्थ मिल सकते हैं। […]

प्रभु के राज्य का जीवन

उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया। (कुलुस्सियों 1:13) मसीह में हमें प्रभु के राज्य के जीवन में बुलाया गया है, एक ऐसा जीवन जहाँ हर दिन चमत्कार और अलौकिकता का अंतहीन प्रवाह होता है। जब यीशु पृथ्वी पर था, तो उसने राज्य का जीवन जिया। […]

उसकी सामर्थ वास्तविक है, वहम नहीं

मैं इसी कारण उस पिता के साम्हने घुटने टेकता हूं, जिस से स्वर्ग और पृथ्वी पर, हर एक घराने का नाम रखा जाता है। कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें यह दान दे, कि तुम उसके आत्मा से अपने भीतरी मनुष्य में सामर्थ पाकर बलवन्त होते जाओ (इफिसियों 3:14-16)। हमारे मुख्य वर्स […]

अपने भीतरी मनुष्य को मजबूत बनाये

उसकी आत्मा से अपने भीतरी मनुष्य में सामर्थ पाकर बलवन्त होते जाओ (इफिसियों 3:16) मनुष्य एक आत्मा है और वह शरीर में रहता है। अपने बारे में, अपने भीतर के मनुष्य के बारे में शिक्षित होना बहुत महत्वपूर्ण है। परमेश्वर ही जीवन का स्रोत है, और जब आदम ने पाप किया, तो वह जीवन से […]

खुद को चुनौती देना

इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए। तब तुम परमेश्वर- की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहोगे। (रोमियों 12:2 NIV) मसीह लोगों को अपने विश्वास के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए लगातार स्वयं, को चुनौती देने की […]

स्मारक बनाएँ

फिर परमेश्वर ने उन से कहा, सुनो, जितने बीज वाले छोटे छोटे पेड़ सारी पृथ्वी के ऊपर हैं और जितने वृक्षों में बीज वाले फल होते हैं। (उत्पत्ति 1:29A) पृथ्वी पर रहते हुए यीशु ने जो अदभुत कथन दिया था, उनमें से एक था, कि हम वो नहीं हैं जिन्होंने उसे चुना है, बल्कि, उसने […]

परमेश्वर की आवाज़ पर मनन करना

व्यवस्था की यह पुस्तक तेरे चित्त से कभी न उतरने पाए, इसी में दिन रात ध्यान दिए रहना, इसलिये कि जो कुछ उस में लिखा है उसके अनुसार करने की तू चौकसी करे; क्योंकि ऐसा ही करने से तेरे सब काम सफल होंगे, और तू प्रभावशाली होगा। (यहोशू 1:8) परमेश्वर की आवाज़ सिर्फ़ दिव्य निर्देश […]