आपकी संगति मायने रखती है

गुमराह न हों: “बुरी संगति अच्छे चरित्र को बिगाड़ देती है।” (1 कुरिन्थियों 15:33 NIV) यदि आप मसीह हैं, तो यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप परमेश्वर की बुद्धिमत्ता से निर्देशित होकर अपनी संगति चुनें। जिन लोगों के साथ आप घिरे रहते हैं, वे आपके विचारों, आपकी बातचीत और आपके तरीकों को प्रभावित करते हैं। […]

आपकी विश्वसनीयता मायने रखती है

जो थोड़े से थोड़े में सच्चा है, वह बहुत में भी सच्चा है: और जो थोड़े से थोड़े में अधर्मी है, वह बहुत में भी अधर्मी है। (लूका 16:10) हमारा परमेश्वर प्रेममय है और उसकी विश्वसनीयता सदा बनी रहती है। उसकी संतान होने के नाते, उसके प्रति हमारी अटूट विश्वसनीयता अत्यंत महत्वपूर्ण है। विश्वसनीय होने […]

मसीह में आपकी स्वतंत्रता मायने रखती है

इसलिये उस स्वतंत्रता में स्थिर रहो जिससे मसीह ने हमें स्वतंत्र किया है, और दासत्व के जूए में फिर से न जुतो। (गलातियों 5:1) हमारे मुख्य वर्स में स्वतंत्रता के लिए ग्रीक शब्द “एलुथेरिया (eleutheria)” है, जिसका अर्थ है आजादी। जब आपने यीशु मसीह को अपने निजी उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार किया, तो आप […]

आपका रवैया मायने रखता है

तुम अपने पुराने चालचलन के पुराने मनुष्यत्व को जो भरमानेवाली अभिलाषाओं के अनुसार भ्रष्ट होता जाता है, उतार डालो; और अपने मन के आत्मिक स्वभाव में नये बनते जाओ। (इफिसियों 4:22-23) एक मसीही के रूप में आपका रवैया आपके विश्वास के मार्ग में महत्वपूर्ण है। परमेश्वर और संसार की चीज़ों के प्रति आपका रवैया परमेश्वर […]

आपकी भाषा और वाणी मायने रखते हैं

जहाँ राजा का वचन होता है, वहाँ सामर्थ होता है…(सभोपदेशक 8:4) एक मसीही के रूप में हम जो बोलते हैं, उसका महत्व है। हम इस दुनिया की भाषा नहीं बोलते। हमारे स्थान और समय की भाषा को हमें नहीं बनाने देना हैं, बल्कि हमें भाषा को बनाना हैं। हमें अपनी भाषा और वाणी को अपने […]

वचन शैतान को निष्कासित करता है और शरीर को काबू में करता है

यदि संसार तुम से बैर रखता है, तो तुम जानते हो, कि उस ने तुम से पहिले मुझ से भी बैर रखा। यदि तुम संसार के होते, तो संसार अपनों से प्रीति रखता, परन्तु इस कारण कि तुम संसार के नहीं, वरन मैं ने तुम्हें संसार में से चुन लिया है इसी लिये संसार तुम […]

परमेश्वर का वचन बोलता है

पर पहिले यह जान लो कि पवित्र शास्त्र की कोई भी भविष्यद्वाणी किसी के अपने ही विचारधारा के आधार पर पूर्ण नहीं होती। (2 पतरस 1:20) 2 तीमुथियुस 2:15 में, पॉल ने, तीमुथियुस से बात करते समय उसे मन लगाकर पवित्र शास्त्र का अध्ययन करने के लिए कहा और आगे उसने उससे कहा कि ऐसा […]

वचन के साथ संगति!

और उद्धार का टोप, और आत्मा की तलवार जो परमेश्वर का वचन है, ले लो। (इफिसियों 6:17) परमेश्वर का वचन एक व्यक्ति है। इसलिए एक मसीह के रूप में वचन के साथ आपकी संगति, आपके जीवन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण पहलू है। बाइबिल कहती है: “और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से […]

शास्त्रवचन पढना: उस पर कार्य करना!

इन बातों को जिनकी आज्ञा मैं तुझे सुनाता हूं चित्त लगाकर सुन, कि जब तू वह काम करे जो तेरे परमेश्वर यहोवा की दृष्टि में भला और ठीक है, तब तेरा और तेरे बाद, तेरे वंश का भी सदा भला होता रहे। (व्यवस्थाविवरण 12:28) जब हम शास्त्रवचन का अध्ययन करते हैं, तो हम परमेश्वर के […]

शास्त्रवचन पढना: उस पर कार्य करना!

इन बातों को जिनकी आज्ञा मैं तुझे सुनाता हूं चित्त लगाकर सुन, कि जब तू वह काम करे जो तेरे परमेश्वर यहोवा की दृष्टि में भला और ठीक है, तब तेरा और तेरे बाद, तेरे वंश का भी सदा भला होता रहे। (व्यवस्थाविवरण 12:28) जब हम शास्त्रवचन का अध्ययन करते हैं, तो हम परमेश्वर के […]