हर दिन अपने भीतरी मनुष्य को मजबूत बनाए

इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है। (2 कुरिन्थियों 4:16) परमेश्वर ने कभी नहीं चाहा कि आपका आत्मिक जीवन साल-दर-साल एक जैसा बना रहे। जिस तरह आपके शरीर को हर दिन खाने की आवश्यकता होती है, उसी तरह […]
परमेश्वर के वचन से अपने मन का नवीनीकरण करें

इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है। (2 कुरिन्थियों 4:16) क्या आप जानते हैं कि आपका मन उन सबसे महान साधनों में से एक है जो परमेश्वर ने आपको दिए हैं? आपके जीवन की दिशा बहुत हद तक […]
विजय के लिए अपनी आत्मा को प्रशिक्षित करे

पर अन्न सयानों के लिये है, जिन के ज्ञानेन्द्रिय अभ्यास करते करते, भले बुरे में भेद करने के लिये पक्के हो गए हैं (इब्रानियों 5:14)। जिस प्रकार एक खिलाड़ी ट्रॉफी जीतने के लिए अपने शरीर को प्रशिक्षित करता है, उसी प्रकार निरंतर विजय में जीने के लिए आपकी आत्मा को भी प्रशिक्षण की आवश्यकता होती […]
अपने भीतरी मनुष्य से जीवन जिए

कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें यह दान दे, कि तुम उसके आत्मा से अपने भीतरी मनुष्यत्व में सामर्थ पाकर बलवन्त होते जाओ (इफिसियों 3:16)। परमेश्वर ने कभी भी यह नहीं चाहा कि आप अपना जीवन मुख्य रूप से बाहरी परिस्थितियों, भावनाओं या शारीरिक इंद्रियों के अनुसार जिए। आप एक आत्मा है, […]
अंदर से बाहर की ओर जीवन जिए

परन्तु मनुष्य में आत्मा तो है ही, और सर्वशक्तिमान अपनी दी हुई सांस से उन्हें समझने की शक्ति देता है। (अय्यूब 32:8) जैसे की एक और वर्ष समाप्त हो रहा है, हम में से बहुत से लोग सच में प्रगति, और बढ़ोतरी की गवाही दे सकते हैं। हालाँकि, यह अनुभव सभी का नहीं है। कुछ […]
उसकी सामर्थ वास्तविक है, वहम नहीं
मैं इसी कारण उस पिता के साम्हने घुटने टेकता हूं, जिस से स्वर्ग और पृथ्वी पर, हर एक घराने का नाम रखा जाता है। कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें यह दान दे, कि तुम उसके आत्मा से अपने भीतरी मनुष्य में सामर्थ पाकर बलवन्त होते जाओ (इफिसियों 3:14-16)। हमारे मुख्य वर्स […]
अपने भीतरी मनुष्य को मजबूत बनाये
उसकी आत्मा से अपने भीतरी मनुष्य में सामर्थ पाकर बलवन्त होते जाओ (इफिसियों 3:16) मनुष्य एक आत्मा है और वह शरीर में रहता है। अपने बारे में, अपने भीतर के मनुष्य के बारे में शिक्षित होना बहुत महत्वपूर्ण है। परमेश्वर ही जीवन का स्रोत है, और जब आदम ने पाप किया, तो वह जीवन से […]