करुणा: मसीह के हृदय द्वारा कार्य करना

पर जिस किसी के पास संसार की संपत्ति हो और वह अपने भाई को कंगाल देख कर उस पर तरस न खाना चाहे, तो उस में परमेश्वर का प्रेम क्योंकर बना रह सकता है? (1 यूहन्ना 3:17) करुणा केवल वह भावना नहीं है जिसे हम महसूस करते हैं; यह मसीह का जीवन है जो कार्य […]
वह आपके प्रेम के श्रम को याद रखता है

क्योंकि परमेश्वर अन्यायी नहीं, कि तुम्हारे काम, और उस प्रेम को भूल जाए, जो तुम ने उसके नाम के लिये इस रीति से दिखाया, कि पवित्र लोगों की सेवा की, और कर भी रहे हो। ( इब्रानियों 6:10) परमेश्वर मनुष्य नहीं है जो यह भूल जाये कि आपने उसके लिए क्या किया है। यह एक […]
परमेश्वर के भवन में आपकी सेवा
इन बातों के बाद प्रभु ने सत्तर और मनुष्य नियुक्त किए और जिस जिस नगर और जगह को वह आप जाने पर था, वहां उन्हें दो दो करके अपने आगे भेजा। और उस ने उन से कहा; “कटाई तो बहुत है; परन्तु मजदूर थोड़े हैं: इसलिये खेत के स्वामी से बिनती करो, कि वह अपने […]