सत्य की सामर्थ

और तुम सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्वतंत्र करेगा। (यूहन्ना 8:32 ) हर दिन, हम बड़ी मात्रा में सूचना और ज्ञान के संपर्क में आते हैं – इनमे से कुछ लाभदायक होते है, जबकि अधिकांश अनावश्यक होते है। सिर्फ इसलिए कि कोई बात सत्य है इसका मतलब यह नहीं है कि वह उपयोगी है […]

जब आप नहीं जानते कि क्या करना है

क्योंकि जो, अन्य ‘भाषा में बातें करता है; वह मनुष्यों से नहीं, परन्तु परमेश्वर से बातें करता है; इसलिये कि उस की कोई नहीं समझता; क्योंकि वह भेद की बातें आत्मा में होकर बोलता है। (1 कुरिन्थियों 14:2) एक मानव मस्तिष्क और मानवीय क्षमताएं सीमित और परिमित हैं और इसी कारण से, एक प्राकृतिक मनुष्य […]

पवित्र आत्मा स्वयं हमारे लिए मध्यस्थता करता है

वैसे ही आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है, क्योंकि हम नहीं जानते कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए; परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है (रोमियों 8:26)। एक मसीह के रूप में यदि आप कभी ऐसी परिस्थितियों का सामना करते हैं […]

पवित्र आत्मा को सुनना

प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह और परमेश्वर का प्रेम और पवित्र आत्मा की सहभागिता तुम सब के साथ होती रहे॥ आमीन (2 कुरिन्थियों 13:14)। मैंने एक बार परमेश्वर के एक महान जन को यह कहते हुए सुना, “पवित्र आत्मा उनसे बात करता है जो सुनने की परवाह करते हैं”, यह कितना सच है! जितना आपके […]

आत्मिक बात करे

हे भाइयों, मैं तुम से इस रीति से बातें न कर सका, जैसे आत्मिक लोगों से; परन्तु जैसे शारीरिक लोगों से, और उन से जो मसीह में बालक हैं। (1 कुरिन्थियों 3: 1)। युहन्ना 11 हमें लाज़र की कहानी बताता है, जो बीमार हो गया और मर गया। यीशु ने जब सुना, उसने अपने चेलों से कहा “… हमारा मित्र लाज़र […]

भावना मायने नहीं रखती!

तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना। (नीतिवचन 3:5) कई मसीह लोग परमेश्वर की उपस्थिति को परिभाषित करने के लिए अपनी भावनाओं पर निर्भर रहते हैं। जबकि, सच तो यह है कि भावनाएं भरोसेमंद नहीं होतीं। भावनाएँ पूरी तरह से मानवीय अनुभव पर, आधारित मानवीय सोच का […]

यह वचन के द्वारा होता है!

यदि हम आत्मा के द्वारा जीवित हैं, तो आत्मा के अनुसार चलें भी। (गलातियों 5:25) परमेश्वर का वचन हमारी आत्मा के लिए निर्माण सामग्री है। यह हमारी आत्मा को प्रशिक्षित करने के लिए एकमात्र सामग्री है। इसलिए हमारे जीवन में परमेश्वर के वचन को केंद्र स्थान देना महत्वपूर्ण है। जब आप अपनी आत्मा को परमेश्वर […]

परमेश्वर की आवाज का अनुसरण करें

जिसके कान हों, वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है॥ (प्रकाशित वाक्य 3:22) क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप किसी गलत काम में पड़ गए हों, और आपको अपने अंदर से सही रास्ता बताते हुई एक आवाज सुनाई दी हो? वह परमेश्वर की आवाज़ है, जो आपका मार्गदर्शन करती […]

आत्मिक रूप से आज्ञाकारी बनें: आपकी स्थिति

पर यदि जैसा वह ज्योति में है, वैसे ही हम भी ज्योति में चलें, तो एक दूसरे से सहभागी होंगे, और उसके पुत्र यीशु का लोहू हमें सब पापों से शुद्ध करेगा। (1 यूहन्ना 1:7) शारीरिक या भौगोलिक स्थिति के विपरीत, आपकी आत्मिक स्थिति आपके विश्वास की स्थिति से निर्धारित होती है। क्या आप परमेश्वर […]

आत्मिक रूप से आज्ञाकारी बनें : भाग 1

इसलिये पहिले तुम परमेश्वर के राज्य और सत्यनिष्ठा की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। (मत्ती 6:33) स्वर्ग का राज्य सिर्फ एक अवधारणा नहीं है – यह वास्तविक सामर्थ और दिव्य अधिकार वाला एक वास्तविक राज्य है। मसीह में, हम इस राज्य में जन्मे हैं, और विश्वासियों के रूप में, हम […]