विश्लेषण करें और उसकी इच्छा के अनुरूप चलें!
छोटे से छोटा एक हजार हो जाएगा और सब से दुर्बल एक सामर्थी जाति बन जाएगा। मैं यहोवा हूं; ठीक समय पर यह सब कुछ शीघ्रता से पूरा करूंगा॥ (यशायाह 60:22) हम एक बार फिर उस समय पर हैं जब हम पीछे मुड़कर देख सकते हैं और प्रभु को उसकी विश्वसनीयता और भलाई के लिए […]
यह धन्यवाद का दिन है!
उसके फाटकों से धन्यवाद करते हुए, और उसके आंगनों में स्तुति करते हुए प्रवेश करो; उसका धन्यवाद करो, और उसके नाम को धन्य कहो। (भजन संहिता 100:4) आज हमारी मिनिस्ट्री में, हम वर्ष के महिमामय और अलौकिक प्रथम भाग के पूरा होने के लिए परमेश्वर का आदर और धन्यवाद करेंगे। जैसा कि हम इस अर्ध-वार्षिक […]
महानता धन्यवाद के द्वारा पायी जाती है
और पिता का धन्यवाद करो, जिस ने हमें इस योग्य बनाया कि हम ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में सहभागी हों। (कुलुस्सियों 1:12) धन्यवाद देना आशीष का प्रवेश द्वार है, और परमेश्वर की संतान होने के नाते, आपके लिए अपने जीवन के हर कदम पर आभारी होना अनिवार्य है। कृतज्ञ हृदय के बिना […]
अधिक के लिए ख्वाहिश रखिये!
तब यहोशू ने इस्राएलियों से कहा, जो देश तुम्हारे पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा ने तुम्हें दिया है, उसे अपने अधिकार में कर लेने में तुम कब तक ढिलाई करते रहोगे? (यहोशू 18: 3) परमेश्वर की एक संतान के रूप में, आपके लिए हमेशा महिमा का एक उच्च स्तर होता है, हमेशा सफलता का उच्च स्तर […]
आपको छुटकारे की ज़रूरत नही है
और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिस ने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में समभागी हों। उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया। (कुलुस्सियों 1:12-13) अगर आप नए जन्में हैं, तो आपको शैतान की शक्ति से पहले ही छुटकारा […]
डुनामिस की ओर प्रबुद्ध किया जाना
परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे (प्रेरितों के काम 1:8)। सामर्थ शब्द का शाब्दिक अर्थ है नियंत्रणकारी प्रभाव, श्रेष्ठता या अधिकार का होना। हालाँकि, हमारे मुख्य वर्स में ‘सामर्थ’ शब्द का गहरा अर्थ है, […]
दिव्य चेतना
मेरे ज्ञान के न होने से मेरी प्रजा नाश हो गई… (होशे 4:6आ) क्या आपने हमारे मुख्य वर्स में कुछ नोटिस किया? परमेश्वर यह नहीं कह रहा है कि पापियों का नाश हो गया है, बल्कि वह अपने पवित्र लोगों की बात कर रहा है। यदि वह पवित्र लोगों की बात नहीं कर रहा होता, […]
दिव्य जीवन
जिस के पास पुत्र है, उसके पास जीवन है; और जिस के पास परमेश्वर का पुत्र नहीं, उसके पास जीवन भी नहीं है। (1 यूहन्ना 5:12) मसीह में, हमें दिव्य जीवन प्राप्त हुआ है। इस जीवन के लिए ग्रीक शब्द “ज़ोए” है, इस शब्द का अनुवाद करते समय, इसके कई अलग-अलग अर्थ मिल सकते हैं। […]
प्रभु के राज्य का जीवन
उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया। (कुलुस्सियों 1:13) मसीह में हमें प्रभु के राज्य के जीवन में बुलाया गया है, एक ऐसा जीवन जहाँ हर दिन चमत्कार और अलौकिकता का अंतहीन प्रवाह होता है। जब यीशु पृथ्वी पर था, तो उसने राज्य का जीवन जिया। […]
उसकी सामर्थ वास्तविक है, वहम नहीं
मैं इसी कारण उस पिता के साम्हने घुटने टेकता हूं, जिस से स्वर्ग और पृथ्वी पर, हर एक घराने का नाम रखा जाता है। कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें यह दान दे, कि तुम उसके आत्मा से अपने भीतरी मनुष्य में सामर्थ पाकर बलवन्त होते जाओ (इफिसियों 3:14-16)। हमारे मुख्य वर्स […]