जाये और स्वर्गीय भाषा में प्रार्थना करें

जो स्वर्गीय भाषा में बातें करता है, वह अपनी ही उन्नति करता है; परन्तु जो भविष्यद्वाणी करता है, वह कलीसिया की उन्नति करता है(1 कुरिन्थियों 14:4)। परमेश्वर की आत्मा से यह सीधी प्रेरणा आती है: जाये और स्वर्गीय भाषा में प्रार्थना करें। यह निर्देश भले ही सरल लगे, परंतु यह गहन और समयानुकूल है—यह ऐसे […]
परमेश्वर की प्रेरणा बुद्धिमत्ता देती है
हर एक पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और सत्यनिष्ठा की शिक्षा के लिये लाभदायक है। (2 तीमुथियुस 3:16) परमेश्वर की बुद्धिमत्ता मनुष्यों की राय में या इस दुनिया के रूपों में नहीं पाई जाती — यह पवित्र आत्मा की प्रेरणा द्वारा, उसके वचन के माध्यम से […]
दिव्य चेतना
मेरे ज्ञान के न होने से मेरी प्रजा नाश हो गई… (होशे 4:6आ) क्या आपने हमारे मुख्य वर्स में कुछ नोटिस किया? परमेश्वर यह नहीं कह रहा है कि पापियों का नाश हो गया है, बल्कि वह अपने पवित्र लोगों की बात कर रहा है। यदि वह पवित्र लोगों की बात नहीं कर रहा होता, […]
दिव्य जीवन
जिस के पास पुत्र है, उसके पास जीवन है; और जिस के पास परमेश्वर का पुत्र नहीं, उसके पास जीवन भी नहीं है। (1 यूहन्ना 5:12) मसीह में, हमें दिव्य जीवन प्राप्त हुआ है। इस जीवन के लिए ग्रीक शब्द “ज़ोए” है, इस शब्द का अनुवाद करते समय, इसके कई अलग-अलग अर्थ मिल सकते हैं। […]
उसकी सामर्थ वास्तविक है, वहम नहीं
मैं इसी कारण उस पिता के साम्हने घुटने टेकता हूं, जिस से स्वर्ग और पृथ्वी पर, हर एक घराने का नाम रखा जाता है। कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें यह दान दे, कि तुम उसके आत्मा से अपने भीतरी मनुष्य में सामर्थ पाकर बलवन्त होते जाओ (इफिसियों 3:14-16)। हमारे मुख्य वर्स […]
खुद को चुनौती देना
इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए। तब तुम परमेश्वर- की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहोगे। (रोमियों 12:2 NIV) मसीह लोगों को अपने विश्वास के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए लगातार स्वयं, को चुनौती देने की […]
परमेश्वर के अभिषिक्त जन के ज़रिए परमेश्वर की आवाज़ सुनना
और वे सवेरे उठकर तकोआ के जंगल की ओर चल दिए; और जब वे चल रहे थे, तब यहोशापात खड़ा होकर कहने लगा, हे यहूदियो, और हे यरूशलेम के निवासियो, मेरी सुनो; अपने परमेश्वर यहोवा पर विश्वास रखो, तब तुम स्थिर रहोगे; उसके नबियों की प्रतीत करो, तब तुम कृतार्थ होगे। (2 इतिहास 20:20) परमेश्वर […]
प्रेरित पौलुस के जीवन से सबक
मैं तो पहिले निन्दा करने वाला और सताने वाला और अन्धेर करने वाला था; तौभी मुझ पर दया हुई, क्योंकि मैं ने अविश्वास की दशा में बिन समझे बूझे, ये काम किए थे और हमारे प्रभु का अनुग्रह उस विश्वास और प्रेम के साथ जो मसीह यीशु में है, बहुतायत से हुआ। (1 तीमुथियुस 1: […]
यहोशू के जीवन से सबक
तेरे जीवन भर कोई तेरे साम्हने ठहर न सकेगा; जैसे मैं मूसा के संग रहा वैसे ही तेरे संग भी रहूंगा; और न तो मैं तुझे धोखा दूंगा और न तुझ को छोडूंगा। इसलिये हियाव बान्धकर दृढ़ हो जा; क्योंकि जिस देश के देने की शपथ मैं ने इन लोगों के पूर्वजों से खाई थी […]
नहेमायाह के जीवन से सबक।
शहरपनाह के बनाने वाले और बोझ के ढोने वाले दोनों भार उठाते थे, अर्थात एक हाथ से काम करते थे और दूसरे हाथ से हथियार पकड़े रहते थे(नहेमायाह 4:17)। नहेमायाह फारस के राजा का पिलानेहार था। जब उसे यरूशलेम की स्थिति, यरूशलेम के लोगों और मंदिर के बारे में पता चला, उसने यरूशलेम की दीवारों […]