एलीशा ने कहा, यहोवा का वचन सुनो… (2 राजा 7:1)

जीवन में ऐसे समय आते हैं जब परमेश्वर का इंतज़ार करना आवश्यक होता है, लेकिन ऐसे समय भी आते हैं जब परमेश्वर हमारा इंतज़ार कर रहा होता है। एलीशा का यह वृत्तांत हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर के सेवकों को सिर्फ कठिन परिस्थितियों को देखते रहने के लिए नहीं बुलाया गया है, बल्कि उसके वचन के अनुसार प्रतिक्रिया देने के लिए बुलाया गया है। जब सामरिया में स्थिति असंभव दिखाई दे रही थी, तब भी परमेश्वर का जवाब पहले से उपलब्ध था। ज़रूरत थी विश्वास की ऐसी घोषणा की, जो स्वर्ग की इच्छा के साथ संरेखित हो।

कितनी बार हम उन चीज़ें को टाल देते हैं जिन्हें परमेश्वर पहले ही हमारी पहुँच में रख चुका है? हम बेहतर परिस्थितियों, अधिक आत्मविश्वास या किसी स्पष्ट चिन्ह का इंतज़ार करते रहते हैं, जबकि परमेश्वर ने हमें मसीह में वह सब कुछ प्रदान कर दिया है जिसकी हमें आवश्यकता है। जिस कार्य के लिए उसने हमें बुलाया है, उसी के लिए उसने हमें सामर्थ दिया है। हमें ऐसा जीवन नहीं जीना चाहिए मानो की हम परमेश्वर के कार्य शुरू करने का इंतज़ार कर रहे हों, जबकि वह पहले ही हमारे अंदर अपना कार्य शुरू कर चुका है।

सेना युद्ध शुरू होने पर प्रशिक्षण नहीं करती—वह पहले से ही पूरी निष्ठा के साथ प्रशिक्षण करती है। उसी तरह हमारी तैयारी भी निरंतर होनी चाहिए। प्रतिदिन प्रार्थना करना, परमेश्वर के वचन पर मनन करना, धन्यवाद देना और विश्वास से भरी घोषणाएँ करना सिर्फ धार्मिक क्रियाएँ नहीं हैं; वे प्रदर्शन की तैयारी हैं।

आज्ञाकारिता को टालें नहीं। परमेश्वर के निर्देश के प्रति अपनी प्रतिक्रिया में देरी मत करे। यह कल का चुपचाप इंतज़ार करने का समय नहीं है। परमेश्वर अपने लोगों को बुला रहा है कि वे उठें, उसके वचन पर विश्वास करें, और आज ही उसकी महिमा को प्रकट करें। जिसकी आपको आवश्यकता है, वह पहले से ही आपके पास है, क्योंकि मसीह आप में, महिमा की आशा है।

घोषणा:
अनुग्रहकारी पिता, मैं आपका धन्यवाद करता हूँ क्योंकि आपने मसीह यीशु में मेरी ज़रूरत की हर चीज़ पूरी की है। मैं घोषणा करता हूँ कि मैं आपके उद्देश्य को पूरा करने के लिए तैयार, सुसज्जित और सामर्थी बनाया गया हूँ। मैं विश्वास में साहसपूर्वक चलता हूँ, यह जानते हुए कि आपने मेरे बारे में जो कहा है, वह अवश्य पूरा होगा। यीशु के अनमोल नाम में। आमीन।

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