दृढ़ता से आलस को ‘ना’ कहें

यदि तू ऐसा पुरूष देखे जो कामकाज में निपुण हो? तो वह राजाओं के सम्मुख खड़ा होगा; छोटे लोगों के सम्मुख नहीं (नीतिवचन 22:29)। आलस सिर्फ शरीर की कमजोरी नहीं है; यह मन की एक ऐसी स्थिति है जो उद्देश्य, अनुशासन और बढ़ोतरी का विरोध करती है। मसीह में, आपको जीवन में यूँ ही भटकने […]
दृढ़ता से बीमारी को ‘ना’ कहें

वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिए हुए क्रूस पर चढ़ गया जिस से हम पापों के लिये मर कर के सत्यनिष्ठा के लिये जीवन बिताएं: उसी के मार खाने से तुम चंगे हुए (1 पतरस 2:24)। मसीह में बीमारी आपकी पहचान का हिस्सा नहीं है, और इसे कभी भी सामान्य मानकर […]
खुद पर विश्वास के संदेशों की बौछार करें

सो विश्वास सुनने से, और सुनना मसीह के वचन से होता है (रोमियों 10:17)। विश्वास आकस्मिक रूप से नहीं बढ़ता; इसे जानबूझकर बढ़ाया जाता है।क्योंकि विश्वास सुनने से आता है, तो मजबूत विश्वास बनाए रखने के लिए परमेश्वर के वचन के निरंतर संपर्क में रहना आवश्यक है। विश्वास के संदेश से खुद को भरने का […]
हर परिस्थिति में परमेश्वर का वचन बोलें

जीभ के वश में मृत्यु और जीवन दोनों होते हैं, और जो उसे काम में लाना जानता है वह उसका फल भोगेगा (नीतिवचन 18:21)। मसीह में, आपके शब्द साधारण नहीं होते—वे आत्मिक अधिकार से भरे होते हैं। परमेश्वर ने आपको अपना वचन इसलिए दिया है ताकि आप जिस परिस्थिति का सामना करें, उसमें उसकी वास्तविकता […]
सिर्फ़ जोश ही काफी नहीं है

कि उन को परमेश्वर के लिये धुन रहती है, परन्तु बुद्धिमानी(ज्ञान) के साथ नहीं। (रोमियों 10:2) ज्ञान के बिना जुनून विनाश की ओर ले जाता है। बहुत से लोग सच्चे मन से परमेश्वर की सेवा करना चाहते हैं, लेकिन अस्थिरता में चलते हैं, क्योंकि उनका जोश सत्य पर आधारित नहीं होता। जो बात लॉजिकल लगती […]
अपने मन को नवीनीकृत करने की ज़िम्मेदारी

और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए… (रोमियों 12:2) नया साल अपने आप नए परिणाम नहीं लाता। कई लोग नए साल में उत्साह और अपेक्षा के साथ प्रवेश करते हैं, लेकिन पुराने पैटर्न दोहराते हुए साल के अंत में निराश हो जाते […]
उस वचन की ओर फिर से लौटें

अपने आप को परमेश्वर के सामने ग्रहणयोग्य ठहराने का यत्न कर, ऐसा काम करनेवाला जो लज्जित न हो, और सत्य के वचन को ठीक रीति से काम में लाए। (2 तीमुथियुस 2:15) जैसे-जैसे हम वर्ष के अंत की ओर बढ़ रहे हैं, यह बहुत ज़रूरी है कि हम जान-बूझकर उन बातों को फिर से याद […]
मसीह मुझ में: परमेश्वर की उपस्थिति का वास

पिता जो मुझमें रहता है, वही काम करता है। (यूहन्ना 14:10) क्रिसमस एक महान सत्य की घोषणा करता है — परमेश्वर मनुष्य बना ताकि परमेश्वर मनुष्यों के अंदर रह सके। यीशु को पवित्र आत्मा की संतान कहा गया क्योंकि पवित्र आत्मा मरियम के ऊपर आया था। और आज, हर नया जन्म ग्रहण करके बना विश्वासी, […]
सही अंगीकार की सामर्थ

क्योंकि सत्यनिष्ठा के लिये मन से विश्वास किया जाता है, और उद्धार के लिये मुंह से अंगीकार किया जाता है। (रोमियों 10:10) आपका जीवन आपके घोषणा के स्तर पर ऊपर या नीचे जाता है। बहुत से विश्वासी परमेश्वर के साथ चलने में संघर्ष करते हैं, इसलिए नहीं कि उन में विश्वास की कमी है, बल्कि […]
वचन पर दृढ़ खड़े रहे

क्योंकि हम रूप को देखकर नहीं, पर विश्वास से चलते हैं। (2 कुरिन्थियों 5:7) परमेश्वर की संतान के रूप में, आप कभी भी परिस्थितियों पर अपनी दृष्टि के अनुसार प्रतिक्रिया देने के लिए नहीं बनाये गए थे। आप प्रतिक्रिया उस अनुसार देते है जो परमेश्वर कहता है। जब विपरीत परिस्थितियाँ आती हैं, तो आपकी ज़िम्मेदारी […]