संसार के प्रति आपका दृष्टिकोण
जैसे मैं संसार का नहीं, वैसे ही वे भी संसार के नहीं। अपने सत्य के द्वारा उन्हें पवित्र कर: तेरा वचन सत्य है। जैसे तू ने मुझे जगत में भेजा है, वैसे ही मैं ने भी उन्हें जगत में भेजा है। (यूहन्ना 17:16-18) एक मसीह के रूप में आप दो स्तर में रहते हैं। एक […]
शास्त्रों के प्रति आपका दृष्टिकोण
सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और सत्यनिष्ठा की शिक्षा के लिये लाभदायक है। ताकि परमेश्वर का जन सिद्ध बने, और हर एक भले काम के लिये तत्पर हो जाए। (2 तीमुथियुस 3:16-17) हमारा मुख्य वर्स एक सुन्दर सत्य को उजागर करता है कि सभी शास्त्र […]
खुद के प्रति आपका दृष्टिकोण
जो अपना प्राण बचाता है, वह उसे खोएगा; और जो मेरे लिये अपना प्राण खोता है, वह उसे पाएगा। (मत्ती 10:39) हमारा मुख्य वर्स खुद हमारे प्रभु यीशु द्वारा कहा गया कथन है। इसलिए, यह ऐसी चीज है जिसके बारे में किसी को भी अपने जीवन पर विचार करते समय गहराई से सोचना चाहिए। मसीह […]
पीछे मत हटिए
और मेरा सत्यनिष्ठ जन विश्वास से जीवित रहेगा, और यदि वह पीछे हट जाए तो मेरा मन उस से प्रसन्न न होगा। (इब्रानियों 10:38) बहुत से ऐसे लोग होते हैं जो परमेश्वर के साथ अपनी यात्रा, बहुत उल्लास के साथ शुरू करते हैं परन्तु उसी उल्लास के साथ इसे जारी नही रखते। जब वे नए […]
अपनी योजनाओं को हटाएँ
तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना। उसी को स्मरण करके अपने सब काम करना, तब वह तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा। (नीतिवचन 3:5-6) आपके जीवन के लिए परमेश्वर की योजना सदैव आपकी अपनी योजनाओं और स्कीम से कई ज़्यादा महान और आगे होती है। एक बात […]
इस को मान लें कि आपको उसकी ज़रूरत है
परन्तु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा परन्तु जो कुछ सुनेगा वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा। (यूहन्ना 16:13) पवित्र आत्मा पर निर्भर रहना सीखना आपकी आत्मिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह सिर्फ एक कौशल नहीं है, […]
अपने देश के लिए प्रार्थना करें
मैं सब से पहिले यह उपदेश देता हूं, कि बिनती, और प्रार्थना, और निवेदन, और धन्यवाद, सब मनुष्यों के लिये किए जाएं। राजाओं और सब ऊंचे पद वालों के निमित्त इसलिये कि हम विश्राम और चैन के साथ सारी भक्ति और गम्भीरता से जीवन बिताएं। यह हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर को अच्छा लगता, और भाता भी […]
स्वार्थी प्रार्थनाएं मत कीजिए
तुम मांगते हो और पाते नहीं, इसलिये कि बुरी इच्छा से मांगते हो, ताकि अपने भोग विलास में उड़ा दो।(याकूब 4:3) प्रार्थना परमप्रधान के साथ वार्तालाप है। परमेश्वर की संतान होने के नाते प्रार्थना हमारे लिए एक मिनिस्ट्री है। इसलिए आप हर एक चीज़ और हर एक व्यक्ति को परे हटा कर, सिर्फ परमेश्वर को […]
अपने समय का सबसे अच्छा उपयोग करें
हम को अपने दिन गिनने की समझ दे कि हम बुद्धिमान हो जाएं॥(भजन संहिता 90:12) समय एक अद्भुत धरोहर है| यह एक ऐसी धरोहर है जो जब एक बार खो जाती है, दोबारा पायी नही जा सकती| पैसे वापिस आ सकते हैं, सम्पति वापिस आ सकती है, परन्तु एक बार समय खो जाए तो वो […]
महानता के लिए खुद को तैयार करें: केंद्रित रहें
यीशु ने उस से कहा, जो मनुष्य, हल पर हाथ रखकर पीछे देखता है, वह परमेश्वर के राज्य के योग्य नहीं। (लूका 9:62) आज के सीक्रेट ऑफ़ सक्सेस का आरंभिक वर्स यह सुझाव देता है कि जो विचलित हो जाता है वह राज्य के योग्य नहीं है। इसका मतलब यह है कि यदि आप विचलित […]