शब्दों के द्वारा अपना भविष्य बनाना

विश्वास ही से हम जान जाते हैं, कि सारी सृष्टि की रचना परमेश्वर के वचन के द्वारा हुई है। यह नहीं, कि जो कुछ देखने में आता है, वह देखी हुई वस्तुओं से बना हो (इब्रानियों 11:3)। आपका आज का जीवन काफी हद तक उन शब्दों का परिणाम है जो आपने कल बोले थे – […]
अपने शब्दों से आगे बढ़ना

जीभ के वश में मृत्यु और जीवन दोनों होते हैं, और जो उसे काम में लाना जानता है वह उसका फल भोगेगा (नीतिवचन 18:21)। आपके शब्द साधारण नहीं हैं—वे आत्मिक शक्तियाँ हैं जो आपके तक़दीर को आकार देती हैं। आपके जीवन की दिशा आपके शब्दों की दिशा का अनुसरण करती है। हर बार जब आप […]
अपने विश्वास को व्यर्थ मत करें

क्योंकि यदि व्यवस्था वाले वारिस हैं, तो विश्वास व्यर्थ और प्रतिज्ञा निष्फल ठहरी। (रोमियों 4:14) क्या विश्वास को व्यर्थ किया जा सकता है? निश्चित रूप से हाँ! हमारा मुख्य वर्स हमें दिखाता है कि अपने विश्वास को व्यर्थ बनाना संभव है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने जीवन को दिशा देने के लिए अपने […]
अपनी योजनाओं को हटाएँ

तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना। उसी को स्मरण करके अपने सब काम करना, तब वह तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा। (नीतिवचन 3:5-6) आपके जीवन के लिए परमेश्वर की योजना सदैव आपकी अपनी योजनाओं और स्कीम से कई ज़्यादा महान और आगे होती है। एक बात […]
विश्वास: वह सामर्थ जो परिणाम उत्पन्न करती है

अब विश्वास आशा की हुई वस्तुओं का निश्चय, और अनदेखी वस्तुओं का प्रमाण है (इब्रानियों 11:1)। विश्वास केवल यह मानना नहीं है कि परमेश्वर का अस्तित्व है; यह आत्मा की जीवित सामर्थ है जो अदृश्य वास्तविकताओं को प्रकट करती है। विश्वास उस बात को थाम लेता है जो परमेश्वर ने कही है और उसे आपके […]
आत्मा के द्वारा शरीर पर प्रभुत्व

परन्तु मैं अपनी देह को मारता कूटता, और वश में लाता हूं; ऐसा न हो कि औरों को प्रचार करके, मैं आप ही किसी रीति से निकम्मा ठहरूं(1 कुरिन्थियों 9:27)। प्रेरित पौलुस ने इस वचन में एक शक्तिशाली सत्य प्रकट किया है—उसने अपने शरीर को उसके जीवन के मार्ग पर राज करने की अनुमति नहीं […]
आप एक आत्मा हैं! अपने शरीर पर विजय पाएँ

क्योंकि शरीर आत्मा के विरोध में, और आत्मा शरीर के विरोध में लालसा करती है, और ये एक दूसरे के विरोधी हैं; इसलिये कि जो तुम करना चाहते हो वह न करने पाओ(गलातियों 5:17)। सीखने और खुद को अपग्रेड करने की क्षमता बहुत महत्वपूर्ण है। पवित्रशास्त्र के इस भाग से हम समझते हैं कि कुछ […]
आपको सिर्फ उसके वजूद के ज्ञान को पाना है

कि हमारे प्रभु यीशु मसीह का परमेश्वर जो महिमा का पिता है, तुम्हें अपनी पहचान में, ज्ञान और प्रकाश का आत्मा दे। और तुम्हारे मन की आंखें ज्योतिर्मय हों कि तुम जान लो कि उसके बुलाने से कैसी आशा होती है, और पवित्र लोगों में उस की मीरास की महिमा का धन कैसा है। ( […]
उसके दृष्टिकोण को अपना बना लें

उसने हर चीज़ को अपने-अपने समय पर सुंदर बनाया है। उसने मनुष्य के मन में अनादि-अनन्त काल का ज्ञान भी रखा है; फिर भी कोई भी समझ नहीं सकता कि परमेश्वर ने आरम्भ से अन्त तक क्या किया है। (सभोपदेशक 3:11) परमेश्वर ने हमारे हृदय में अनन्ता का ज्ञान डाला है। हर वस्तु जिसकी हम […]
यीशु से शर्मिंदा मत होइए

क्योंकि मैं सुसमाचार से नहीं लजाता, इसलिये कि वह हर एक विश्वास करने वाले के लिये, पहिले तो यहूदी, फिर यूनानी के लिये उद्धार के निमित परमेश्वर की सामर्थ है। (रोमियों 1:16) यह बहुत ज़रूरी है की हम अपने प्रभु यीशु मसीह के साथ अपनी पहचान पर गर्व करें। परमेश्वर की संतान होने के नाते, […]