सीखने वाली आत्मा विकसित करें

जो शिक्षा को सुनी-अनसुनी करता, वह अपने प्राण को तुच्छ जानता है, परन्तु जो डांट को सुनता, वह बुद्धि प्राप्त करता है।(नीतिवचन 15:32) आत्मिक रूप से आगे बढ़ने के सबसे तेज़ तरीकों में से एक है हमेशा सीखने के लिए तैयार रहना। परमेश्वर अक्सर अपने वचन, अपनी पवित्र आत्मा और परमेश्वर के लीडर्स के द्वारा […]
साधारणता के साथ पवित्र असंतोष विकसित करें

और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। (रोमियों 12:2) परमेश्वर ने आपको सिर्फ़ जीने के लिए नहीं बनाया है। उसने आपको बढ़ने, उत्कृष्ट बनने और वह […]
समर्पण की फलवन्तता

मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जब तक गेहूं का दाना भूमि में पड़कर मर नहीं जाता, वह अकेला रहता है परन्तु जब मर जाता है, तो बहुत फल लाता है। (यूहन्ना 12:24) परमेश्वर के राज्य के महान सिद्धांतों में से एक है समर्पण का सिद्धांत। प्रभु यीशु ने सिखाया कि किसी बीज […]
प्रमोशन का रास्ता

क्योंकि बढ़ती न तो पूरब से न पच्छिम से, और न ही दक्षिण से। परन्तु परमेश्वर ही न्यायी है, वह एक को घटाता और दूसरे को बढ़ाता है। (भजन संहिता 75:6–7) सच्ची सफलता क्या है? यह केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है—यह तब होती है जब आपका जीवन दूसरों पर प्रभाव डालने लगता है और परमेश्वर […]
गिदोन के जीवन से सबक।
उसको यहोवा के दूत ने दर्शन देकर कहा, हे शूरवीर सूरमा, यहोवा तेरे संग है। (न्यायियों 6:12) गिदोन इस्राएल में एक न्यायाधीश और पराक्रमी योद्धा था। वह मनश्शे जनजाति के एक गरीब परिवार में सबसे छोटा था। परमेश्वर ने उसे मिद्यानियों के अत्याचार से इस्राएल को छुड़ाने के लिए बुलाया। परमेश्वर ने इस्राएल को पड़ोसी […]
अभिषेक और अभिषिक्त जन के प्रति आपका दृष्टिकोण!
मेरे अभिषिक्त को मत छूओ, और मेरे नबियों की हानि मत करो। (भजन संहिता 105:15) एक मसीही होने के नाते आपके अंदर परमेश्वर के अभिषिक्त दास और दासी के प्रति बहुत आदर और सम्मान होना चाहिए। बाइबल 1 थिस्सलुनीकियों 5:13 में कहती है कि “प्रेम में उनका बहुत आदर करो।” जब परमेश्वर आपको किसी दास […]