आत्मा से, न कि दृष्टि से!

क्योंकि शरीर के अनुसार चलने वाले शरीर की बातें पर मन लगाते हैं; परन्तु आत्मिक मनुष्य आत्मा की बातें पर मन लगाते हैं। (रोमियों 8:5) जीवन आत्मिक है। जो लोग आत्मा के द्वारा जीते हैं वे चिंता, डर और ज्यादा सोचने से ख़ुद को ऊपर उठा लेते हैं। सांसारिक मन हमेशा यह जानने की कोशिश […]
सही मायने में देने से उत्पन्न होने वाली सामर्थ

परन्तु बात तो यह है, कि जो थोड़ा बोता है वह थोड़ा काटेगा भी; और जो बहुत बोता है, वह बहुत काटेगा। (2 कुरिन्थियों 9:6) देना कोई आर्थिक कार्य नहीं है – यह एक आत्मिक कार्य है। असली देना प्रकटीकरण से उत्पन्न होता है, न कि रूटीन से। जब आप कुछ ऐसा बोते हैं जिसमें […]
अपने दिव्य कार्य पर केंद्रित रहना

तेरी आंखें साम्हने ही की ओर लगी रहें, और तेरी पलकें आगे की ओर खुली रहें (नीतिवचन 4:25)। परमेश्वर की हर संतान के पास एक दिव्य कार्य है – एक विशिष्ट उद्देश्य और योगदान जो संसार की नींव रखने से पहले पिता द्वारा तैयार किया गया था। महिमा बहुत सारे काम करने में नहीं है, […]
सत्य को मोल लेना

सच्चाई को मोल लेना, बेचना नहीं; और बुद्धि और शिक्षा और समझ को भी मोल लेना। (नीतिवचन 23:23) परमेश्वर सबसे अच्छा व्यक्तित्व है हमें यह सिखाने के लिए कि जीवन में सफल कैसे हो सकते हैं| परमेश्वर की बुद्धिमता कुछ समय दुनिया के लिए बेवकूफी होती है| यह मनुष्य के समझ से परे है और […]
स्वर्गीय भाषा में प्रार्थना करके अपना वातावरण बदलें

एलिय्याह भी तो हमारे समान दुख-सुख भोगी मनुष्य था; और उस ने गिड़िगड़ा कर प्रार्थना की; कि मेंह न बरसे; और साढ़े तीन वर्ष तक भूमि पर मेंह नहीं बरसा(याकूब 5:17)। ऐसे क्षण आते हैं जब आप परमेश्वर के वचन से प्रेरित होते हैं—शायद चर्च में, सीक्रेट ऑफ़ सक्सेस का अध्ययन करते समय, या किसी […]
परमेश्वर रहस्यमय नहीं है

तुम को स्वर्ग के राज्य के भेदों की समझ दी गई है। (मत्ती 13:11) क्या यह जानना अद्भुत नहीं है कि परमेश्वर अपनी संतानों के लिए रहस्यमय नहीं है? बहुत से लोग, अज्ञानता या परम्परा के कारण यह विश्वास करते हैं कि परमेश्वर के मार्ग छिपे हुए और अज्ञात हैं। लेकिन यीशु ने हमें यह […]
एलीशा के जीवन से सबक
उनके पार पहुंचने पर एलिय्याह ने एलीशा से कहा, उस से पहिले कि मैं तेरे पास से उठा लिये जाऊं जो कुछ तू चाहे कि मैं तेरे लिये करूं वह मांग; एलीशा ने कहा, तुझ में जो आत्मा है, उसका दूना भाग मुझे मिल जाए। (2 राजा 2:9) एलीशा भविष्यवक्ता एलिय्याह के संरक्षण में एक […]
आपका दृष्टिकोण क्या है?
क्योंकि मसीह का प्रेम हमें विवश कर देता है, इसलिये कि हम निश्चय जानते हैं, कि एक सब के लिये मरा तो सब मर गए। और वह सब के लिये मरा, ताकि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उनके लिये मरा और फिर जी उठा। (2 कुरिन्थियों […]