जानें कि मसीह में आप कौन हैं

सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्टि है। (2 कुरिन्थियों 5:17) आत्मिक उन्नति की सबसे महत्वपूर्ण चाबियों में से एक है मसीह में अपनी पहचान को समझना। जब आप जानते हैं कि परमेश्वर आपके बारे में क्या कहता है, तब असुरक्षा अपनी शक्ति खो देती है और आत्मविश्वास बढ़ने लगता है। बहुत-से […]
आप स्वर्ग के नागरिक हैं

पर हमारा स्वदेश स्वर्ग पर है; और हम एक उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के वहां से आने ही बाट जोह रहे हैं। (फिलिप्पियों 3:20) विश्वासी होने के नाते, हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि हमारा जीवन केवल इस संसार के सिस्टम तक सीमित नहीं है। यद्यपि हम शारीरिक रूप से इस दुनिया में रहते हैं, […]
आप एक राज्य के हैं

क्योंकि परमेश्वर का राज्य बातों में नहीं, परन्तु सामर्थ में है। (1 कुरिन्थियों 4:20) क्या आपने कभी रुककर सोचा है कि आप वास्तव में किससे जुड़े हुए हैं? आप केवल किसी सभा का हिस्सा नहीं हैं—आप परमेश्वर के राज्य का हिस्सा हैं। और हर राज्य की एक व्यवस्था होती है: एक राजा, एक प्रजा, एक […]
प्रभु यीशु – वह जो हर परिस्थिति में आपका मार्गदर्शन करता है

मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं, और मैं उन्हें जानता हूं, और वे मेरे पीछे पीछे चलती हैं। (यूहन्ना 10:27) प्रभु यीशु आपके निर्णयों से दूर नहीं है—वह हर कदम पर आपका व्यक्तिगत रूप से मार्गदर्शन करता है। वह आपको जानता है, आपके जीवन के हर विवरण से अवगत है, और आपसे बात करता हैं। […]
प्रभु यीशु को अपना मानें

हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। (मत्ती 11:28) आप अपने जीवन में प्रभु यीशु को कैसे पहचानते हैं, यह इस बात को निर्धारित करता है कि आपका उसके साथ कैसा रिश्ता हैं। यह एक बात है कि आप जानते हैं कि यीशु प्रभु हैं, […]
हर परिस्थिति में परमेश्वर का वचन बोलें

जीभ के वश में मृत्यु और जीवन दोनों होते हैं, और जो उसे काम में लाना जानता है वह उसका फल भोगेगा (नीतिवचन 18:21)। मसीह में, आपके शब्द साधारण नहीं होते—वे आत्मिक अधिकार से भरे होते हैं। परमेश्वर ने आपको अपना वचन इसलिए दिया है ताकि आप जिस परिस्थिति का सामना करें, उसमें उसकी वास्तविकता […]
वही मत रुकें!

और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए। (रोमियों 12:2) विश्वास एक आत्मिक मसल(muscle)है, और सभी मसल(muscle) की तरह, यह तभी बढ़ती है जब इसका इस्तेमाल किया जाता है। क्षमता तब बढ़ती है जब आप ख़ुद को उस स्तर से आगे खिंचते हैं […]
वचन पर दृढ़ खड़े रहे

क्योंकि हम रूप को देखकर नहीं, पर विश्वास से चलते हैं। (2 कुरिन्थियों 5:7) परमेश्वर की संतान के रूप में, आप कभी भी परिस्थितियों पर अपनी दृष्टि के अनुसार प्रतिक्रिया देने के लिए नहीं बनाये गए थे। आप प्रतिक्रिया उस अनुसार देते है जो परमेश्वर कहता है। जब विपरीत परिस्थितियाँ आती हैं, तो आपकी ज़िम्मेदारी […]
बिना दबाव के विश्वास को दृढ़ करना

चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। (भजन संहिता 46:10) विश्वास और दबाव एक साथ नहीं रह सकते। सच्चा विश्वास परमेश्वर के वचन के आश्वासन पर आधारित होता है, न कि मानव प्रयास या चिंता पर। जब आप पूरी तरह से परमेश्वर पर भरोसा करते हैं, तो आप अपने बल से […]
परमेश्वर के साथ असीमित

क्योंकि परमेश्वर के लिये कुछ भी असंभव नहीं। (लूका 1:37) परमेश्वर की सप्लाई कभी ख़त्म नहीं होती। हर दिन, उसने आपके लिए प्रचुर प्रावधान उपलब्ध कराया है – आत्मिक और शारीरिक दोनों रूपों में। जब आप उसके साथ चलते हैं, तो आप अनुग्रह और पक्ष के असीमित प्रवाह में कदम रखते हैं। परमेश्वर के साथ […]