अपने जीवन का पैटर्न बदलें

इसलिये परमेश्वर के आधीन हो जाओ; और शैतान का साम्हना करो, तो वह तुम्हारे पास से भाग निकलेगा। (याकूब 4:7) यदि आपके जीवन में कोई बात बार-बार दोहराई जा रही है, तो वह संयोग नहीं है। वह एक पैटर्न है। और पैटर्न केवल चाहने से नहीं बदलते — वे निर्णय लेने से बदलते हैं। एक […]
बिना दबाव के जीवन जीने के लिए बुलाए गए

इसलिये कि जितने लोग परमेश्वर के आत्मा के चलाए चलते हैं, वे ही परमेश्वर के पुत्र हैं। (रोमियों 8:14) दबाव मार्गदर्शन नहीं है। दबाव बुद्धिमत्ता नहीं है। जब आपका मन दबाव में कार्य करता है, तो वह और अधिक चिंता को आकर्षित करता है। धन का दबाव और अधिक कमी को आकर्षित करता है। कार्य […]
आपका हृदय कहाँ लगा है?

क्योंकि जहां तेरा ख़ज़ाना है वहां तेरा हृदय भी लगा रहेगा। (मत्ती 6:21) आपसे बेहतर कोई नहीं जानता कि वास्तव में आपके हृदय में क्या है। यह वह नहीं है जो आप सार्वजनिक रूप से कहते हैं। वह नहीं जो सुनने में आत्मिक लगता है। वास्तव में आपको क्या प्रेरित करता है? प्रभु यीशु ने […]
धन के पीछे की आत्मिक व्यवस्था!

क्योंकि रूपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है। (1 तीमुथियुस 6:10) धन केवल एक आर्थिक वस्तु नहीं है; इसका एक आत्मिक पहलू भी है। जब परमेश्वर ने आदम को बनाया, तब कमी की कोई व्यवस्था नहीं थी। जो कुछ उसे चाहिए था, वह सब पहले से ही प्रदान किया गया था। धन […]
विजय पर आधारित, संघर्ष पर नहीं!

धन यहोवा की आशीष ही से मिलता है, और वह उसके साथ दु:ख नहीं मिलाता। (नीतिवचन 10:22) क्या यह जानना आनंद की बात नहीं है कि परमेश्वर ने आपके जीवन को संघर्ष के इर्द-गिर्द नहीं बनाया है? हां, चुनौतियाँ हो सकती है। हाँ, विरोध हो सकता है। लेकिन परिणाम पहले ही तय हो चुका है—विजय […]
आप यीशु से प्रेम क्यों करते हैं?

हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उस ने हम से प्रेम किया। (1 यूहन्ना 4:19) क्या आप यीशु से प्रेम करते हैं? यह एक शक्तिशाली प्रश्न है। लेकिन एक इससे भी गहरी बात है कि —आप उससे प्रेम क्यों करते हो? यह महत्वपूर्ण है कि आपके पास इसका उत्तर हो। यीशु के प्रति हमारा […]
आत्मा में निपुण

और विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है। (इब्रानियों 11:6) हमने सीखा है कि जीवन आत्मिक है। चूँकि, जीवन आत्मिक है, क्या हमें आत्मिक बातों में निपुण नहीं होना चाहिए? बहुत से लोग प्रार्थना करते हैं और आश्चर्य करते हैं कि कुछ भी क्यों नहीं बदलता। सच्चाई यह है कि ऐसा इसलिए नहीं है क्योंकि […]
अपने तथ्यों की पहचान से मत जिए

मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया हूं, और अब मैं जीवित न रहा, पर मसीह मुझ में जीवित है: और मैं शरीर में अब जो जीवित हूं तो केवल उस विश्वास से जीवित हूं, जो परमेश्वर के पुत्र पर है, जिस ने मुझ से प्रेम किया, और मेरे लिये अपने आप को दे […]
सूखी हड्डियों से भविष्यवाणी करें

तब उसने मुझ से कहा, इन हड्डियों से भविष्यद्वाणी कर के कह….इस आज्ञा के अनुसार मैं भविष्यद्वाणी करने लगा; और मैं भविष्यद्वाणी कर ही रहा था, कि एक आहट आई,और भुईडोल हुआ। (यहेजकेल 37:4,7) भविष्यनिश्चयवानी करने का अर्थ है—परमेश्वर के वचन को वैसे ही घटित होने के लिए घोषित करना, जैसे उसने आज्ञा दी है। […]
कुछ भी आकस्मिक नहीं है

पर हे परमेश्वर के जन, तू इन बातों से भाग; और सत्यनिष्ठा, भक्ति, विश्वास, प्रेम, धीरज, और नम्रता का पीछा कर। (1 तीमुथियुस 6:11) आपके जीवन में कुछ भी आकस्मिक नहीं है। कुछ भी संयोग नहीं है। आपका जीवन कोई दुर्घटना नहीं—यह एक जिम्मेदारी है जिसे परमेश्वर ने आपके हाथों में सौंपा है। बहुत से […]