अब्राहम की तरह केंद्रित रहें

उसने अपने मरे हुए से शरीर… और सारा के गर्भ की मरी हुई की सी दशा जानकर भी विश्वास में निर्बल न हुआ। (रोमियों 4:19) अब्राहम फोकस का एक शानदार उदाहरण है। जब परमेश्वर ने उसे एक प्रतिज्ञा दी, तब स्वाभाविक परिस्थितियों में सब कुछ उसके विपरीत दिखाई देता था। वह और सारा संतान उत्पन्न […]
परमेश्वर ने जो कहा, उस पर केंद्रित रहें

इसलिये तुम अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञा के अनुसार करने में चौकसी करना; न तो दाहिने मुड़ना और न बांए। (व्यवस्थाविवरण 5:32) राज्य में सफलता की सबसे शक्तिशाली चाबीयों में से एक बहुत सरल है—परमेश्वर ने जो कहा है, उसी पर बने रहें। बहुत से लोग अच्छी शुरुआत करते हैं, लेकिन ध्यान भटकाने वाली बातें […]
आपके मन की सामर्थ

क्योंकि जैसा वह अपने मन में विचार करता है, वैसा वह आप है। (नीतिवचन 23:7) आपका मन परमेश्वर द्वारा आपको दिये गए सबसे शक्तिशाली उपहारों में से एक है। इसे अद्भुत क्षमता और सामर्थ के साथ बनाया गया है। वास्तव में, आपका मन ही वह साधन है जिसके द्वारा परिवर्तन घटित होता है। जब आपका […]
एक महिमामय समापन के लिए दृढ़ निश्चय!

मैं मसीह के द्वारा सब कुछ कर सकता हूँ जो मुझे सामर्थ देता है। (फिलिप्पियों 4:13) परमेश्वर की संतान होने के नाते आपको अपने आप से यह प्रश्न अवश्य पूछना चाहिए: क्या आप जो शुरू करते हैं उसे पूरा भी करते हैं? या क्या आप लगातार नई-नई चीज़ें शुरू करते रहते हैं, बिना पुरानी चीज़ों […]
अब और देरी नहीं

यह नहीं, कि हम अपने आप से इस योग्य हैं, कि अपनी ओर से किसी बात का विचार कर सकें; पर हमारी योग्यता परमेश्वर की ओर से है। (2 कुरिन्थियों 3:5) एक चीज़ जो चुपचाप बहुत से लोगों को सीमित कर देती है—वह है टालना और विलंभ करना। यह अक्सर अपने आप को “सही समय […]
बहाने बनाना छोड़ें

इसलिये कि जिस ने तुम्हें अन्धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो। (1 पतरस 2:9) बहाने सूक्ष्म होते हैं, लेकिन वे बहुत महंगे पड़ते हैं। जब तक आप बहानों को जगह देते रहेंगे, उत्कृष्टता आपसे दूर ही रहेगी। आप महिमा से भरा जीवन नहीं जी सकते, जब आप साधारणता […]
अपनी भावनाओं से परे

तुम सारे जगत में जाकर सारी सृष्टि के लोगों को सुसमाचार प्रचार करो। (मरकुस 16:15) कई विश्वासी परमेश्वर की आज्ञा का पालन केवल तब करते हैं जब उन्हें ऐसा करने के लिए “प्रेरणा महसूस” होती है। उनके निर्णय भावनाओं पर आधारित होते हैं। कुछ दिनों पर वे दृढ़ महसूस करते हैं; और कुछ दिनों पर […]
इसे झुका दें

क्योंकि यदि तुम शरीर के अनुसार दिन काटोगे, तो मरोगे, यदि आत्मा से देह की क्रीयाओं को मारोगे, तो जीवित रहोगे। (रोमियों 8:13) बहुत से लोग जीवन के प्रति प्रतिक्रिया दे रहे हैं इसे नेतृत्व नहीं कर रहे। वे परिस्थितियों के प्रति ऐसे प्रतिक्रिया करते हैं मानो परिस्थितियाँ ही नियंत्रण में हों। लेकिन यह आपकी […]
क्या आप अंदर से जीवन जी रहे हैं?

परन्तु जब कि परमेश्वर का आत्मा तुम में बसता है, तो तुम शारीरिक दशा में नहीं, परन्तु आत्मिक दशा में हो। (रोमियों 8:9) एक मसीही के रूप में आपको अपने आप से यह प्रश्न अवश्य पूछना चाहिए—क्या आप अंदर से जीवन जी रहे हैं, या बाहर की हर परिस्थिति पर केवल प्रतिक्रिया कर रहे हैं? […]
महानता वही है जो आप बनाये हुए हैं!

परन्तु जब कि परमेश्वर का आत्मा तुम में बसता है, तो तुम शारीरिक दशा में नहीं, परन्तु आत्मिक दशा में हो। (रोमियों 8:9) बड़ा होना और महान होना—इन दोनों में फर्क होता है। बड़ा होना एक पोजीशन है। और महानता एक स्वभाव है। पोजीशन बदल सकता है। टाइटल फीका पड़ सकता हैं। लेकिन महानता? वह […]