अनुशासन के लाभ

…दुसरे हाथ पर, खुद को अनुशासित करो इश्वरियता के उद्देश्य से (1 तीमुथियुस 4:7 एन ऐ एस बी ) अनुशासन आपको बड़ी उपलब्धियाँ बहुत कम प्रयासों में हासिल करने में मदद करता है। अनुशासन का मतलब है खुद को बांधना और विवश करना निर्धारित सिद्धांतों और तरीकों पर चलने के लिए और हर एक इच्छा […]
मास्टर को प्रसन्न करने के लिए जिएँ

और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा। (2 कुरिन्थियों 5:15) जब आप अपने लिए जीना छोड़कर प्रभु को प्रसन्न करने के लिए जीना शुरू करते हैं, तब एक सामर्थी बदलाव होता […]
अपने विचारों को मसीह की आज्ञाकारिता में बंदी बनाइए!

हम तर्क-वितर्कों और हर ऊँची बात को, जो परमेश्वर की पहचान के विरोध में उठती है, नष्ट करते हैं; और हर एक विचार को बंदी बनाकर मसीह की आज्ञाकारिता के अधीन कर लेते हैं। (2 कुरिन्थियों 10:5, अनुवादित Amplified Classic से) आपके विचार आपके जीवन की दिशा तय करते हैं। जो आपके मन में बना […]
सही सोचें, सही जीवन जिएँ

क्योंकि जैसा वह अपने मन में सोचता है, वैसा ही वह होता है… (नीतिवचन 23:7) आपका जीवन हमेशा आपकी सोच की दिशा में आगे बढ़ता है। इसलिए अपने विचारों को परखना बहुत ज़रूरी है। हर विचार जो मन में आता है, सही नहीं होता, और हर विचार परमेश्वर की ओर से नहीं होता। कई बार […]
अपनी ज्योति सचमुच चमकने दीजिए
उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें।(मत्ती 5:16) परमेश्वर ने आपको चमकने के लिए बुलाया है—लेकिन चमकना केवल बाहरी बातों से नहीं होता। यह भीतर से शुरू होता है। आपका जीवन तब चमकता है जब आपकी सोच परमेश्वर […]
परमेश्वर के लिए लाभदायक बने

मेरे पिता की महिमा इसी से होती है, कि तुम बहुत सा फल लाओ… (यूहन्ना 15:8) क्या आपने कभी सोचा है कि सच्ची सफलता का क्या अर्थ है? यह व्यक्तिगत उपलब्धियों से परे है। सच्ची सफलता परमेश्वर के लिए फलवंत होना है—ऐसा जीवन जीना जो उसे महिमा दे और उसके उद्देश्य को आगे बढ़ाए। आपका […]
आप “सिर्फ़ एक विश्वासी” नहीं है

क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह पवित्रात्मा का मन्दिर है… और तुम अपने नहीं हो? (1 कुरिन्थियों 6:19) एक सबसे बड़ा धोखा यह सोच है कि, “मैं सिर्फ़ एक विश्वासी हूँ।” यह सोच सब कुछ सीमित कर देती है। आप साधारण नहीं है—आप परमेश्वर के निवास स्थल है। उसकी आत्मा आप में वास करती […]
आप यीशु मसीह की पहचान से पहचाने जाते है

उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया (कुलुस्सियों 1:13)। आपकी पहचान अब आपके अतीत, आपके बैकग्राउंड, या आपकी परिस्थितियों से परिभाषित नही होती—आप यीशु मसीह से पहचाने जाते है। आप परमेश्वर के अपने है। प्रभु यीशु के द्वारा, आप को छुड़ाया गया, खरीदा गया, और एक […]
आप यीशु के संगी वारिस हैं

और यदि सन्तान हैं, तो वारिस भी, वरन परमेश्वर के वारिस और मसीह के संगी वारिस हैं (रोमियों 8:17)। मसीह में, प्रभु यीशु के साथ आपका रिश्ता दूर का नही है—आप को उसी के साथ एकता में लाया गया है। आप केवल एक अनुयायी नहीं हैं; आप उसके संगी वारिस हैं। इसका अर्थ है कि […]
प्रभु यीशु – आपकी सत्यनिष्ठा

जो पाप से अज्ञात था, उसी को उस ने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में होकर परमेश्वर की सत्यनिष्ठा बन जाएं (2 कुरिन्थियों 5:21)। प्रभु यीशु के उद्धार के कार्य को पूरा करने से पहले, लोग व्यवस्था के अधीन जीवन जीते थे, और शत्रु लगातार उसी को उन्हें दोषी ठहराने का आधार बनाता […]