विश्वास का आपका दृष्टिकोण
परन्तु विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है, क्योंकि परमेश्वर के पास आनेवाले को विश्वास करना चाहिए, कि वह है; और अपने खोजनेवालों को प्रतिफल देता है। (इब्रानियों 11:6) एक मसीह के रूप में आपको विश्वास के जीवन में बुलाया गया है। प्रभु यीशु ने अपनी शिक्षाओं और दृष्टांतों के माध्यम से विश्वास को एक […]
खुद के प्रति आपका दृष्टिकोण
जो अपना प्राण बचाता है, वह उसे खोएगा; और जो मेरे लिये अपना प्राण खोता है, वह उसे पाएगा। (मत्ती 10:39) हमारा मुख्य वर्स खुद हमारे प्रभु यीशु द्वारा कहा गया कथन है। इसलिए, यह ऐसी चीज है जिसके बारे में किसी को भी अपने जीवन पर विचार करते समय गहराई से सोचना चाहिए। मसीह […]
आपका दृष्टिकोण क्या है?
क्योंकि मसीह का प्रेम हमें विवश कर देता है, इसलिये कि हम निश्चय जानते हैं, कि एक सब के लिये मरा तो सब मर गए। और वह सब के लिये मरा, ताकि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उनके लिये मरा और फिर जी उठा। (2 कुरिन्थियों […]
सत्य को मोल लेना
सच्चाई को मोल लेना, बेचना नहीं; और बुद्धि और शिक्षा और समझ को भी मोल लेना। (नीतिवचन 23:23) परमेश्वर सबसे अच्छा व्यक्तित्व है हमें यह सिखाने के लिए कि जीवन में सफल कैसे हो सकते हैं| परमेश्वर की बुद्धिमता कुछ समय दुनिया के लिए बेवकूफी होती है| यह मनुष्य के समझ से परे है और […]
उसने हमारे हृदय में अनन्ता स्थापित की है
उसने हर चीज़ को अपने-अपने समय पर सुंदर बनाया है। उसने मनुष्य के मन में अनादि-अनन्त काल का ज्ञान भी रखा है; फिर भी कोई भी समझ नहीं सकता कि परमेश्वर ने आरम्भ से अन्त तक क्या किया है। (सभोपदेशक 3:11) परमेश्वर ने हमारे हृदय में अनन्ता का ज्ञान डाला है। हर वस्तु जिसकी हम […]
क्या आप परमेश्वर के राज्य में एक अहम व्यक्ति हैं?
सो इसलिये कि तू गुनगुना है, और न ठंडा है और न गर्म, मैं तुझे अपने मुंह में से उगलने पर हूं। (प्रकाशित वाक्य 3:16) मसीहत कोई धर्म नही है, यह परमेश्वर का जीवन है जो एक मनुष्य में हैं। यह परमेश्वर है जो अपना जीवन आप में और आपके द्वारा जी रहा है। चाहे […]
परमेश्वर के भवन में आपकी सेवा
इन बातों के बाद प्रभु ने सत्तर और मनुष्य नियुक्त किए और जिस जिस नगर और जगह को वह आप जाने पर था, वहां उन्हें दो दो करके अपने आगे भेजा। और उस ने उन से कहा; “कटाई तो बहुत है; परन्तु मजदूर थोड़े हैं: इसलिये खेत के स्वामी से बिनती करो, कि वह अपने […]
जीवन में सही प्राथमिकताएँ
हे मूर्खों, और अन्धों, कौन बड़ा है, सोना या वह मन्दिर जिस से सोना पवित्र होता है? (मत्ती 23:17) कुछ ऐसे हैं जो बहुत सारा धन पाते हैं पर उनका धन हर बार ख़त्म हो जाता है| और कुछ ऐसे भी हैं जो बहुत सारा धन बचाते हैं पर वह कभी नही बढ़ता| धन पाना […]
पहले परमेश्वर के राज्य की खोज करो!
इसलिये पहिले तुम परमेश्वर के राज्य और सत्यनिष्ठा की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। (मत्ती 6:33) हमारा मुख्य वर्स हमारे मास्टर यीशु द्वारा दिया गया कथन है। वह आपसे ऐसी चीज़ खोजने को नहीं कहेगा जिसे खोजना संभव नहीं है। फिर, उसने लूका 12:32 में कहा, “हे छोटे झुण्ड, मत […]
निस्वार्थ भाव से दें
क्योंकि जहां तेरा धन है, वहीं तेरा मन भी रहेगा। (मत्ती 6:21) परमेश्वर ने हमें अपने स्वरूप में बनाया है और वह हमसे अत्यन्त प्रेम करता है। उसने हमें अपनी समानता में इसलिए बनाया है ताकि हम उसकी सृष्टि के मुकुट बनें, जिन्हें उसे जानने और उसके साथ संगति करने का सौभाग्य प्राप्त है। यीशु […]