सिर्फ़ जोश ही काफी नहीं है

कि उन को परमेश्वर के लिये धुन रहती है, परन्तु बुद्धिमानी(ज्ञान) के साथ नहीं। (रोमियों 10:2) ज्ञान के बिना जुनून विनाश की ओर ले जाता है। बहुत से लोग सच्चे मन से परमेश्वर की सेवा करना चाहते हैं, लेकिन अस्थिरता में चलते हैं, क्योंकि उनका जोश सत्य पर आधारित नहीं होता। जो बात लॉजिकल लगती […]
अपने मन को नवीनीकृत करने की ज़िम्मेदारी

और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए… (रोमियों 12:2) नया साल अपने आप नए परिणाम नहीं लाता। कई लोग नए साल में उत्साह और अपेक्षा के साथ प्रवेश करते हैं, लेकिन पुराने पैटर्न दोहराते हुए साल के अंत में निराश हो जाते […]
उस वचन की ओर फिर से लौटें

अपने आप को परमेश्वर के सामने ग्रहणयोग्य ठहराने का यत्न कर, ऐसा काम करनेवाला जो लज्जित न हो, और सत्य के वचन को ठीक रीति से काम में लाए। (2 तीमुथियुस 2:15) जैसे-जैसे हम वर्ष के अंत की ओर बढ़ रहे हैं, यह बहुत ज़रूरी है कि हम जान-बूझकर उन बातों को फिर से याद […]
मसीह मुझ में: परमेश्वर की उपस्थिति का वास

पिता जो मुझमें रहता है, वही काम करता है। (यूहन्ना 14:10) क्रिसमस एक महान सत्य की घोषणा करता है — परमेश्वर मनुष्य बना ताकि परमेश्वर मनुष्यों के अंदर रह सके। यीशु को पवित्र आत्मा की संतान कहा गया क्योंकि पवित्र आत्मा मरियम के ऊपर आया था। और आज, हर नया जन्म ग्रहण करके बना विश्वासी, […]
सही अंगीकार की सामर्थ

क्योंकि सत्यनिष्ठा के लिये मन से विश्वास किया जाता है, और उद्धार के लिये मुंह से अंगीकार किया जाता है। (रोमियों 10:10) आपका जीवन आपके घोषणा के स्तर पर ऊपर या नीचे जाता है। बहुत से विश्वासी परमेश्वर के साथ चलने में संघर्ष करते हैं, इसलिए नहीं कि उन में विश्वास की कमी है, बल्कि […]
वचन पर दृढ़ खड़े रहे

क्योंकि हम रूप को देखकर नहीं, पर विश्वास से चलते हैं। (2 कुरिन्थियों 5:7) परमेश्वर की संतान के रूप में, आप कभी भी परिस्थितियों पर अपनी दृष्टि के अनुसार प्रतिक्रिया देने के लिए नहीं बनाये गए थे। आप प्रतिक्रिया उस अनुसार देते है जो परमेश्वर कहता है। जब विपरीत परिस्थितियाँ आती हैं, तो आपकी ज़िम्मेदारी […]
हर चुनौती: एक अवसर!

जितने हथियार तेरी हानि के लिये बनाए जाएं, उन में से कोई सफल न होगा… (यशायाह 54:17) कोई भी चीज़ अचानक आपके खिलाफ नहीं आती। हर स्थिति, हर दबाव, हर चुनौती परमेश्वर के लिए आप में अपनी महिमा प्रकट करने का एक अवसर होता है। वचन हमें सिखाता है कि दुख हल्के और कुछ समय […]
स्थिरता और समृद्धि!

अपने परमेश्वर यहोवा पर विश्वास रखो, तब तुम स्थिर रहोगे; उसके नबियों की प्रतीत करो, तब तुम कृतार्थ हो जाओगे। (2 इतिहास 20:20) परमेश्वर ने आपकी स्थिरता और समृद्धि के लिए एक व्यवस्था निर्धारित की है – उस पर विश्वास और उसके अभिषिक्त और नियुक्त लोगों के प्रति आदर। जब आप प्रभु के वचन पर […]
बिना दबाव के विश्वास को दृढ़ करना

चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। (भजन संहिता 46:10) विश्वास और दबाव एक साथ नहीं रह सकते। सच्चा विश्वास परमेश्वर के वचन के आश्वासन पर आधारित होता है, न कि मानव प्रयास या चिंता पर। जब आप पूरी तरह से परमेश्वर पर भरोसा करते हैं, तो आप अपने बल से […]
परमेश्वर की आवाज़ सुनना

मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं, और मैं उन्हें जानता हूं, और वे मेरे पीछे पीछे चलती हैं। (यूहन्ना 10:27) परमेश्वर को सुनना सीखना एक विश्वासी के लिए सबसे बड़ा सौभाग्य है। आपके अंदर उसकी आत्मा निरंतर मार्गदर्शन करती है, निर्देश देती है, और दिव्य दिशा प्रकट करती है। प्रार्थना और उसके वचन पर मनन […]