प्रभु यीशु को अपना मानें

हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। (मत्ती 11:28) आप अपने जीवन में प्रभु यीशु को कैसे पहचानते हैं, यह इस बात को निर्धारित करता है कि आपका उसके साथ कैसा रिश्ता हैं। यह एक बात है कि आप जानते हैं कि यीशु प्रभु हैं, […]
आप परमेश्वर की भविष्यवाणी की अभिव्यक्ति हैं

आकाश और पृथ्वी टल जाएंगे, परन्तु मेरी बातें कभी न टलेंगी। (मत्ती 24:35) क्या आपने कभी महसूस किया है कि आपका जीवन रैंडम नहीं है? आप पृथ्वी पर परमेश्वर की भविष्यवाणी की योजना की अभिव्यक्ति हैं। आपके अस्तित्व में उद्देश्य है, और आपका जीवन उस बात को प्रकट करने के लिए है जो परमेश्वर पहले […]
पहचानें और डाँटे

कि शैतान का हम पर दांव न चले, क्योंकि हम उस की युक्तियों से अनजान नहीं (2 कुरिन्थियों 2:11)। शैतान जिस तरीकों से विनाश लाने की कोशिश करता है, उनमें से एक तरीका यह है कि वह ऐसे विचार और सोच लाता है जो आपको ऐसा लगता है मानो वे आपके अपने ही हों। बहुत […]
दुश्मन से निपटें

इसलिये परमेश्वर के आधीन हो जाओ; और शैतान का साम्हना करो, तो वह तुम्हारे पास से भाग निकलेगा (याकूब 4:7)। हम ऐसे संसार में रहते हैं जहाँ आत्मिक वास्तविकताएँ लगातार कार्य करती रहती हैं। जहाँ परमेश्वर ने अपने लोगों की सहायता करने के लिए अपने स्वर्गदूतों को नियुक्त किया है, वहीं ऐसी दुष्ट आत्मिक शक्तियाँ […]
बिना दबाव के जीवन जीने के लिए बुलाए गए

इसलिये कि जितने लोग परमेश्वर के आत्मा के चलाए चलते हैं, वे ही परमेश्वर के पुत्र हैं। (रोमियों 8:14) दबाव मार्गदर्शन नहीं है। दबाव बुद्धिमत्ता नहीं है। जब आपका मन दबाव में कार्य करता है, तो वह और अधिक चिंता को आकर्षित करता है। धन का दबाव और अधिक कमी को आकर्षित करता है। कार्य […]
आपका हृदय कहाँ लगा है?

क्योंकि जहां तेरा ख़ज़ाना है वहां तेरा हृदय भी लगा रहेगा। (मत्ती 6:21) आपसे बेहतर कोई नहीं जानता कि वास्तव में आपके हृदय में क्या है। यह वह नहीं है जो आप सार्वजनिक रूप से कहते हैं। वह नहीं जो सुनने में आत्मिक लगता है। वास्तव में आपको क्या प्रेरित करता है? प्रभु यीशु ने […]
धन के पीछे की आत्मिक व्यवस्था!

क्योंकि रूपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है। (1 तीमुथियुस 6:10) धन केवल एक आर्थिक वस्तु नहीं है; इसका एक आत्मिक पहलू भी है। जब परमेश्वर ने आदम को बनाया, तब कमी की कोई व्यवस्था नहीं थी। जो कुछ उसे चाहिए था, वह सब पहले से ही प्रदान किया गया था। धन […]
सूखी हड्डियों से भविष्यवाणी करें

तब उसने मुझ से कहा, इन हड्डियों से भविष्यद्वाणी कर के कह….इस आज्ञा के अनुसार मैं भविष्यद्वाणी करने लगा; और मैं भविष्यद्वाणी कर ही रहा था, कि एक आहट आई,और भुईडोल हुआ। (यहेजकेल 37:4,7) भविष्यनिश्चयवानी करने का अर्थ है—परमेश्वर के वचन को वैसे ही घटित होने के लिए घोषित करना, जैसे उसने आज्ञा दी है। […]
घोषणा की सामर्थ

क्योंकि सत्यनिष्ठा के लिये मन से विश्वास किया जाता है, और उद्धार के लिये मुंह से अंगीकार किया जाता है। (रोमियों 10:10) आपके शब्द आपके विश्वास और उसके प्रकटीकरण के बीच का प्रवेश द्वार हैं। घोषणा सिर्फ बोलना नहीं है – यह परमेश्वर की सच्चाई के प्रति आपकी आत्मिक प्रतिक्रिया है। उद्धार, समृद्धि, चंगाई और […]
अपनी सफलता की भविष्यवाणी करें और निरंतर रहें

क्योंकि अन्त में फल होगा, और तेरी आशा न टूटेगी (नीतिवचन 23:18)। एक विश्वासी के जीवन में सफलता आकस्मिक नहीं होती; यह विश्वास और शब्दों से पता चलता है और इसे निरंतरता के माध्यम से स्थापित किया जाता है। परमेश्वर ने आपको अपना वचन दिया है ताकि आप अपने भविष्य के प्रकट होने से पहले […]