सही सोचें, सही जीवन जिएँ

क्योंकि जैसा वह अपने मन में सोचता है, वैसा ही वह होता है… (नीतिवचन 23:7) आपका जीवन हमेशा आपकी सोच की दिशा में आगे बढ़ता है। इसलिए अपने विचारों को परखना बहुत ज़रूरी है। हर विचार जो मन में आता है, सही नहीं होता, और हर विचार परमेश्वर की ओर से नहीं होता। कई बार […]
अपनी ज्योति सचमुच चमकने दीजिए
उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें।(मत्ती 5:16) परमेश्वर ने आपको चमकने के लिए बुलाया है—लेकिन चमकना केवल बाहरी बातों से नहीं होता। यह भीतर से शुरू होता है। आपका जीवन तब चमकता है जब आपकी सोच परमेश्वर […]
परमेश्वर के लिए लाभदायक बने

मेरे पिता की महिमा इसी से होती है, कि तुम बहुत सा फल लाओ… (यूहन्ना 15:8) क्या आपने कभी सोचा है कि सच्ची सफलता का क्या अर्थ है? यह व्यक्तिगत उपलब्धियों से परे है। सच्ची सफलता परमेश्वर के लिए फलवंत होना है—ऐसा जीवन जीना जो उसे महिमा दे और उसके उद्देश्य को आगे बढ़ाए। आपका […]
आप “सिर्फ़ एक विश्वासी” नहीं है

क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह पवित्रात्मा का मन्दिर है… और तुम अपने नहीं हो? (1 कुरिन्थियों 6:19) एक सबसे बड़ा धोखा यह सोच है कि, “मैं सिर्फ़ एक विश्वासी हूँ।” यह सोच सब कुछ सीमित कर देती है। आप साधारण नहीं है—आप परमेश्वर के निवास स्थल है। उसकी आत्मा आप में वास करती […]
आप यीशु मसीह की पहचान से पहचाने जाते है

उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया (कुलुस्सियों 1:13)। आपकी पहचान अब आपके अतीत, आपके बैकग्राउंड, या आपकी परिस्थितियों से परिभाषित नही होती—आप यीशु मसीह से पहचाने जाते है। आप परमेश्वर के अपने है। प्रभु यीशु के द्वारा, आप को छुड़ाया गया, खरीदा गया, और एक […]
आप यीशु के संगी वारिस हैं

और यदि सन्तान हैं, तो वारिस भी, वरन परमेश्वर के वारिस और मसीह के संगी वारिस हैं (रोमियों 8:17)। मसीह में, प्रभु यीशु के साथ आपका रिश्ता दूर का नही है—आप को उसी के साथ एकता में लाया गया है। आप केवल एक अनुयायी नहीं हैं; आप उसके संगी वारिस हैं। इसका अर्थ है कि […]
प्रभु यीशु – आपकी सत्यनिष्ठा

जो पाप से अज्ञात था, उसी को उस ने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में होकर परमेश्वर की सत्यनिष्ठा बन जाएं (2 कुरिन्थियों 5:21)। प्रभु यीशु के उद्धार के कार्य को पूरा करने से पहले, लोग व्यवस्था के अधीन जीवन जीते थे, और शत्रु लगातार उसी को उन्हें दोषी ठहराने का आधार बनाता […]
प्रभु यीशु – सत्य

यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं (यूहन्ना 14:6)। हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जो आवाज़ों, राय और सूक्ष्म छलावों से भरी हुई है। शत्रु अक्सर भ्रम, भावनाओं और परिस्थितियों के द्वारा वास्तविकता को बिगाड़ने का प्रयास करता है। लेकिन इन सबके बीच यीशु सत्य के रूप […]
प्रभु यीशु आपकी हर आवश्यकता से बढ़कर है

क्योंकि पिता की प्रसन्नता इसी में है कि उस में सारी परिपूर्णता वास करे(कुलुस्सियों 1:19)। प्रभु यीशु आपके लिए पर्याप्त से भी बढ़कर है—आपकी हर आवश्यकता से कही अधिक। आपका अतीत, आपकी गलतियाँ या आपकी वर्तमान परिस्थितियाँ उसे सीमित नही करती। आपकी आवश्यकताएँ उसे परिभाषित नहीं करतीं; उसकी संपूर्णता आपके जीवन को परिभाषित करती है। […]
प्रभु यीशु – एकमात्र जिस पर आप भरोसा और निर्भर कर सकते है

इसलिये जो कोई मेरी ये बातें सुनकर उन्हें मानता है वह उस बुद्धिमान मनुष्य की नाईं ठहरेगा जिस ने अपना घर चट्टान पर बनाया (मत्ती 7:24)। प्रभु यीशु ही वह एकमात्र है जिस पर आप पूरी तरह भरोसा और निर्भर कर सकते है। वह केवल एक शिक्षक या मार्गदर्शक नही है—वह देह में प्रकट हुआ […]