ज़रूरत के समय अपने विश्वास को न निचोड़े— इसे मज़बूत बनाएँ

तब प्रेरितों ने प्रभु से कहा, हमारा विश्वास बढ़ा। (लूका 17:5) जब आप प्रभु के साथ अपनी आत्मिक यात्रा में चलते हैं, तो यह समझना आवश्यक है कि विश्वास कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे आपको मांगना पड़े—यह आपको पहले ही वचन के माध्यम से दिया जा चुका है। बाइबल घोषणा करती है, “सो विश्वास […]
परमेश्वर: वह जो अपने वचन पर अटल रहता है

आकाश और पृथ्वी टल जाएंगे, परन्तु मेरी बातें कभी न टलेंगी। (मत्ती 24:35) क्या यह सुंदर नहीं है कि हम ऐसे परमेश्वर की सेवा करते हैं जो अपने वचन पर अडिग रहता है? उसका वचन अटल, अनन्त और विश्वसनीय है। यह केवल मार्गदर्शन या नैतिक सत्यों का संग्रह नहीं है—यह खुद परमेश्वर हैं जो हमसे […]
डुनामिस की ओर प्रबुद्ध किया जाना
परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे (प्रेरितों के काम 1:8)। सामर्थ शब्द का शाब्दिक अर्थ है नियंत्रणकारी प्रभाव, श्रेष्ठता या अधिकार का होना। हालाँकि, हमारे मुख्य वर्स में ‘सामर्थ’ शब्द का गहरा अर्थ है, […]
उसकी सामर्थ वास्तविक है, वहम नहीं
मैं इसी कारण उस पिता के साम्हने घुटने टेकता हूं, जिस से स्वर्ग और पृथ्वी पर, हर एक घराने का नाम रखा जाता है। कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें यह दान दे, कि तुम उसके आत्मा से अपने भीतरी मनुष्य में सामर्थ पाकर बलवन्त होते जाओ (इफिसियों 3:14-16)। हमारे मुख्य वर्स […]
खुद को चुनौती देना
इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए। तब तुम परमेश्वर- की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहोगे। (रोमियों 12:2 NIV) मसीह लोगों को अपने विश्वास के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए लगातार स्वयं, को चुनौती देने की […]
यहोशू के जीवन से सबक
तेरे जीवन भर कोई तेरे साम्हने ठहर न सकेगा; जैसे मैं मूसा के संग रहा वैसे ही तेरे संग भी रहूंगा; और न तो मैं तुझे धोखा दूंगा और न तुझ को छोडूंगा। इसलिये हियाव बान्धकर दृढ़ हो जा; क्योंकि जिस देश के देने की शपथ मैं ने इन लोगों के पूर्वजों से खाई थी […]
परमेश्वर के भवन की ओर आपका दृष्टिकोण
और मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊंगा: और अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे।( मत्ती 16:18) परमेश्वर का चर्च मसीह के शरीर का हृदय है।परमेश्वर के भवन के प्रति आपका दृष्टिकोण मायने रखता है। ऐसे लोग हैं जो यह कहने में गर्व महसूस करते हैं कि वे चर्च नहीं जाते हैं और […]
खुद के प्रति आपका दृष्टिकोण
जो अपना प्राण बचाता है, वह उसे खोएगा; और जो मेरे लिये अपना प्राण खोता है, वह उसे पाएगा। (मत्ती 10:39) हमारा मुख्य वर्स खुद हमारे प्रभु यीशु द्वारा कहा गया कथन है। इसलिए, यह ऐसी चीज है जिसके बारे में किसी को भी अपने जीवन पर विचार करते समय गहराई से सोचना चाहिए। मसीह […]
आपका दृष्टिकोण क्या है?
क्योंकि मसीह का प्रेम हमें विवश कर देता है, इसलिये कि हम निश्चय जानते हैं, कि एक सब के लिये मरा तो सब मर गए। और वह सब के लिये मरा, ताकि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उनके लिये मरा और फिर जी उठा। (2 कुरिन्थियों […]
यीशु के साथ हमारी एकता और संगति
परमेश्वर सच्चा है, और उसने हमें अपने पुत्र हमारे प्रभु यीशु मसीह की संगति में बुलाया है (1 कुरिन्थियों 1:9)। यीशु मसीह की संगति में बुलाए जाने का अर्थ है कि हम उसके साथ एकता में आ गए हैं। इसका अर्थ है कि हमें उसकी श्रेणी में लाया गया है, और अब हम उसके साथ […]